
NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देश की राजनीति भी तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा पेपर लीक उन्हीं राज्यों में हुए हैं, जहां भाजपा की डबल इंजन सरकारें हैं।
केजरीवाल ने कहा कि वह देश की “जेन-जी” यानी युवाओं से सीधे बात करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि 2017, 2021, 2024 और अब 2026 में भी बड़े स्तर पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, लेकिन जांच एजेंसियां अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि हर बार मामले की जांच CBI को सौंप दी जाती है, लेकिन परिणाम सामने नहीं आते।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने कहा, “देश में जब भी पेपर लीक होता है तो जांच CBI को दे दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या कभी किसी बड़े नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा हुआ? युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है।”
“मोदी सरकार के दौरान 93 पेपर लीक हुए”
AAP प्रमुख ने दावा किया कि केंद्र में मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक 93 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उनके मुताबिक इन परीक्षाओं से करीब 6 करोड़ युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में पेपर लीक होने से युवाओं के मन में सिस्टम को लेकर अविश्वास पैदा हो रहा है।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश के युवा अब केवल शिकायत करके नहीं बैठ सकते। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश के राजनीतिक आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वहां के युवा बदलाव ला सकते हैं तो भारत के युवा भी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठा सकते हैं।
“सिस्टम के पीछे बैठे लोगों की पहचान जरूरी”
NEET पेपर लीक मामले पर बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि वर्षों से ऐसी घटनाएं होती रही हैं, लेकिन केवल सिस्टम को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उन लोगों की पहचान करना जरूरी है जो इस तरह के रैकेट चलाते हैं और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि यदि पेपर लीक रोकना है तो छात्रों और युवाओं को आवाज उठानी होगी। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जनदबाव जरूरी है।
NEET UG 2026 को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ जांच एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है। इस पूरे मामले पर अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।




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