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NEET UG री-एग्जाम में पेपर लीक के बाद बड़ा बदलाव संभव, हाइब्रिड मॉडल और CBT पर मंथन तेज

NEET UG री-एग्जाम में पेपर लीक के बाद बड़ा बदलाव संभव, हाइब्रिड मॉडल और CBT पर मंथन तेज

NEET UG री-एग्जाम में पेपर लीक के बाद बड़ा बदलाव संभव, हाइब्रिड मॉडल और CBT पर मंथन तेज

NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की तैयारी में जुट गई है। री-एग्जाम को लेकर एजेंसी के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बार NEET UG री-एग्जाम पारंपरिक पेन-पेपर मोड की बजाय हाइब्रिड मॉडल में कराया जा सकता है। इसके साथ ही भविष्य में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मॉडल लागू करने पर भी चर्चा हो रही है।

हालांकि इन बदलावों के कारण परीक्षा प्रक्रिया में देरी की आशंका भी बढ़ गई है। अगर री-एग्जाम तय समय से आगे खिसकता है तो MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो सकता है।

पेपर लीक के बाद सुरक्षा पर सबसे ज्यादा फोकस

पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद NTA की सबसे बड़ी प्राथमिकता परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। बताया जा रहा है कि एजेंसी के महानिदेशक (DG), वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार बैठकों में शामिल हो रहे हैं। इन बैठकों में परीक्षा की नई तारीखों से लेकर सिस्टम में तकनीकी बदलावों तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

सबसे ज्यादा जोर Hybrid-NEET मॉडल पर दिया जा रहा है। इस मॉडल का मकसद प्रश्नपत्र के ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिम को कम करना है। मौजूदा व्यवस्था में प्रश्नपत्र पहले से प्रिंट होकर अलग-अलग राज्यों और केंद्रों तक भेजे जाते हैं, जिसे पेपर लीक की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी माना जाता है।

डिजिटल तरीके से भेजा जा सकता है प्रश्नपत्र

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अब पुराने सिस्टम में बदलाव जरूरी हो गया है। इसी वजह से एक ऐसे मॉडल पर विचार किया जा रहा है, जिसमें प्रश्नपत्र एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्म में सीधे परीक्षा केंद्रों तक भेजे जाएं। परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले सेंटर के भीतर ही सुरक्षित सर्वर और हाई-स्पीड प्रिंटर की मदद से पेपर प्रिंट किया जाए।

सूत्रों के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया CCTV निगरानी और सख्त गोपनीयता के बीच पूरी की जा सकती है। इससे पेपर प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान होने वाले संभावित लीक को काफी हद तक रोका जा सकता है। शुरुआती स्तर पर यह मॉडल OMR आधारित परीक्षा के साथ लागू किया जा सकता है।

CBT मॉडल पर भी चल रही चर्चा

NTA पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल की संभावना पर भी विचार कर रहा है। हालांकि यह फैसला आसान नहीं माना जा रहा। हर साल NEET UG परीक्षा में 22 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। इतने बड़े स्तर पर CBT परीक्षा कराने के लिए देशभर में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली व्यवस्था अभी भी बड़ी चुनौती मानी जाती है। कई छात्रों और शिक्षकों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए पेन-पेपर मोड अभी भी ज्यादा सहज और सभी के लिए समान अवसर देने वाला माध्यम है।

वहीं दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स का कहना है कि CBT मॉडल से पेपर लीक, प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े खतरे काफी कम हो सकते हैं। इसी कारण संभावना जताई जा रही है कि NTA पहले Hybrid मॉडल लागू करे और बाद में धीरे-धीरे पूरी तरह CBT आधारित NEET परीक्षा की ओर बढ़े।

री-एग्जाम में देरी से पिछड़ सकता है मेडिकल सेशन

NTA के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर री-एग्जाम आयोजित कराना है। परीक्षा के लिए नया प्रश्नपत्र तैयार करना, विशेषज्ञों की टीम बनाना और पूरी गोपनीयता के साथ प्रिंटिंग कराना लंबी प्रक्रिया मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, नया पेपर तैयार करने में ही 25 से 30 दिन तक का समय लग सकता है।

इसके बाद सुरक्षित प्रिंटिंग और परीक्षा केंद्रों तक व्यवस्था बनाने में अतिरिक्त समय लगेगा। माना जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक जुलाई आ सकता है। अगर NEET UG री-एग्जाम जुलाई में आयोजित होता है तो रिजल्ट अगस्त या सितंबर तक जारी हो सकते हैं।

रिजल्ट के बाद मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया में भी लगभग दो महीने का समय लगता है। ऐसे में MBBS और BDS समेत अन्य मेडिकल कोर्सों का नया शैक्षणिक सत्र नवंबर या दिसंबर तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता

पेपर लीक विवाद और री-एग्जाम की अनिश्चितता ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्र लंबे समय से तैयारी और मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं। वहीं मेडिकल कॉलेजों के शैक्षणिक कैलेंडर पर भी इसका असर पड़ सकता है।

अब सभी की नजर NTA और केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। माना जा रहा है कि एजेंसी जल्द ही परीक्षा के नए प्रारूप और संभावित तारीखों को लेकर बड़ा अपडेट जारी कर सकती है।

Asmita Sarkar

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