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IIM Ahmedabad में हुई अहम बैठक, मैनेजमेंट शिक्षा के भविष्य पर हुई चर्चा

IIM Ahmedabad में हुई अहम बैठक, मैनेजमेंट शिक्षा के भविष्य पर हुई चर्चा

IIM Ahmedabad में हुई अहम बैठक, मैनेजमेंट शिक्षा के भविष्य पर हुई चर्चा

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश के भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) को एक साझा समन्वय मंच पर लाते हुए Indian Institute of Management Ahmedabad में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल, छात्रों के हित, एडमिशन प्रक्रिया और भारत में मैनेजमेंट शिक्षा के भविष्य को लेकर व्यापक चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की। इसमें विभिन्न IIMs के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन, संस्थानों के निदेशक और उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गुजरात और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब देश के मैनेजमेंट संस्थानों पर नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और इंडस्ट्री से जुड़ी शिक्षा को मजबूत करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर चर्चा

बैठक में “विकसित भारत 2047” के विजन में IIMs की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा का मुख्य फोकस छात्र कल्याण, संस्थागत समन्वय, शैक्षणिक उत्कृष्टता, रिसर्च और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर रहा।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि IIMs देश के आर्थिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इन संस्थानों को नेतृत्व और मैनेजमेंट शिक्षा का मजबूत मॉडल बताया।

MBA एडमिशन और स्टूडेंट पॉलिसी पर भी चर्चा

फोरम में उन मुद्दों पर भी चर्चा हुई जो सीधे छात्रों और संस्थानों को प्रभावित करते हैं। इसमें MBA एडमिशन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), एक IIM से दूसरे IIM में छात्र माइग्रेशन और फीस रिफंड पॉलिसी जैसे विषय शामिल रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर चर्चा से यह संकेत मिलता है कि सरकार और संस्थान देशभर के IIMs में कुछ समान मानक विकसित करना चाहते हैं, जबकि हर संस्थान की अपनी अकादमिक पहचान भी बनी रहे।

भविष्य की जरूरतों के अनुसार एडमिशन सिस्टम पर फोकस

बैठक में अंडरग्रेजुएट प्रवेश परीक्षाओं को भविष्य की राष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाने पर भी विचार किया गया। चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि क्या मौजूदा एडमिशन सिस्टम ऐसे छात्रों की पहचान कर पा रहा है जिनमें नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की योग्यता हो।

उच्च शिक्षा क्षेत्र में यह बहस लगातार बढ़ रही है कि भविष्य के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए केवल अकादमिक प्रदर्शन ही नहीं बल्कि व्यवहारिक और विश्लेषणात्मक कौशल भी जरूरी होंगे।

युवा फैकल्टी और नए IIMs को मिलेगा फायदा

फोरम में फैकल्टी सेकेंडमेंट पॉलिसी पर भी चर्चा की गई। इस नीति के तहत अलग-अलग IIMs के शिक्षकों का आदान-प्रदान किया जा सकता है, ताकि युवा फैकल्टी और नए संस्थानों को पुराने और अनुभवी IIMs से सीखने का अवसर मिले।

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे नए IIMs में शिक्षण गुणवत्ता, रिसर्च और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

आरक्षण और प्रशासनिक सुधार भी एजेंडे में शामिल

बैठक में फैकल्टी और गैर-फैकल्टी पदों पर आरक्षण रोस्टर लागू करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इससे साफ है कि मैनेजमेंट शिक्षा सुधारों में अब प्रशासनिक पारदर्शिता, प्रतिनिधित्व और नियमों के पालन जैसे विषय भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।

यह बैठक इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सरकार अब IIMs को केवल अलग-अलग प्रतिष्ठित संस्थानों के रूप में नहीं बल्कि एक समन्वित राष्ट्रीय शिक्षा नेटवर्क के रूप में विकसित करना चाहती है।

AI और डिजिटल बदलाव के दौर में बढ़ेगी IIMs की भूमिका

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और बदलते वर्कफोर्स मॉडल के कारण बिजनेस दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे में IIMs से उम्मीद की जा रही है कि वे ऐसे नेतृत्वकर्ता तैयार करें जो अनिश्चित परिस्थितियों में भी प्रभावी निर्णय ले सकें।

हालिया बैठक ने यह स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में मैनेजमेंट शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उसे राष्ट्रीय विकास, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बदलावों से जोड़कर देखा जाएगा।

Asmita Sarkar

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