
कुछ दिनों की शान्ति के बाद एक बार फिर से अमेरिका के विश्वविद्यालयों में फलस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नार्थ कैरोलिना से लेकर कैलिफ़ोर्निया तक कॉलेज और विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों द्वारा फलस्तीन के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन किये गए। इसी क्रम में वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में गवर्नर ग्लेन यंगकिन के सम्बोधन के दौरान छात्रों ने फलस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया और यंगकिन की शिक्षा नीतियों की आलोचना की। साथ ही परिसर के बाहर फलस्तीनी झंडे भी लहराए। विस्कॉन्सिन मैडिसन यूनिवर्सिटी के कैप रांडेल स्टेडियम में दीक्षांत समोराह में भी फलस्तीन समर्थकों ने प्रदर्शन किया, फलस्तीन के झंडे फहराए।
इस बीच, फलस्तीन के समर्थन में हो रहे इन विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा है कि उनके उत्तराधिकारी फासीवादियों से घिरे हुए हैं और उन्होंने कॉलेज परिसरों को जिहादियों और अमेरिका विरोधी चरमपंथियों के हवाले कर दिया है। ट्रंप ने आगे दावा किया कि जो लोग कॉलेज परिसर में हंगामा करने के लिए प्रदर्शनकारियों को धन दे रहे हैं, वही जो बाइडन के प्रचार अभियान को धन मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक कट्टरपंथी डेमोक्रेटिक पार्टी चला रहा है।
राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के संभावित उम्मीदवार ट्रंप ने कहा कि अगर वह व्हाइट हाउस लौटते हैं तो वह ‘हिंसक कट्टरपंथियों’ को कॉलेजों पर कब्जा नहीं करने देंगे और जो लोग परिसरों में ‘अमेरिका विरोध या यहूदी विरोध’ फैला रहे हैं, उन्हें तत्काल निर्वासित कर दिया जाएगा। ट्रंप ने बाइडन और उनकी पार्टी से यहूदी-विरोधी, अमेरिका के प्रति नफरत फैलाने वालों और अराजकता से लिए दान को वापस करने को कहा।
गौरतलब है कि फलस्तीन में गाजा के लोगों की हालत को लेकर सबसे पहले अमेरिका के छात्रों ने ही आवाज उठाई थी। उन्होंने इस्राइल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। कम से कम यहां के 40 विश्वविद्यालय परिसरों में प्रदर्शन हो चुके हैं। इन लोगों ने गाजा पट्टी में बढ़ती मौतों की संख्या के विरोध में विश्वविद्यालय परिसरों में तंबू लगाए। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को लेकर हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।




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