
आईआईटी दिल्ली ने उद्योगों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग को मजबूत बनाने के लिए नया इंडस्ट्री मेंबरशिप प्रोग्राम शुरू किया है। इस पहल का मकसद कंपनियों को संस्थान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेषज्ञ वैज्ञानिकों, शोध परियोजनाओं और प्रशिक्षित छात्रों से सीधे जोड़ना है, ताकि उद्योग और अकादमिक जगत के बीच एक मजबूत सेतु बनाया जा सके।
कार्यक्रम के तहत कंपनियां वार्षिक सदस्यता लेकर आईआईटी दिल्ली के नवाचार तंत्र से जुड़ सकेंगी। सदस्य संस्थानों को न केवल उभरती तकनीकों और शोध निष्कर्षों तक प्राथमिक पहुंच मिलेगी, बल्कि वे अपनी ज़रूरतों के अनुसार शोध सहयोग और तकनीकी समाधान भी प्राप्त कर सकेंगी। इससे कंपनियों में तेज़ी से नवाचार, उत्पादों का विकास और नई सेवाओं की शुरुआत को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आईआईटी दिल्ली ने इस प्रोग्राम को तीन श्रेणियों में बांटा है—
सिल्वर सदस्यता: 10 लाख रुपये
गोल्ड सदस्यता: 20 लाख रुपये
प्लेटिनम सदस्यता: 50 लाख रुपये
हर श्रेणी के तहत कंपनियों को फैकल्टी विशेषज्ञता, अत्याधुनिक लैब सुविधाओं, कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग, पुस्तकालय संसाधनों और विभिन्न शोध परियोजनाओं तक पहुंच दी जाएगी। संस्थान से जुड़े वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के साथ सीधे बातचीत और सहयोग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
इसके अलावा, सदस्य कंपनियां संयुक्त शोध एजेंडा तैयार कर सकेंगी और सीएक्सओ राउंडटेबल, नेतृत्व मंच, सीएसआर कॉन्क्लेव जैसे विशेष आयोजनों में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकेंगी। ऐसे कार्यक्रम उद्योगों को तकनीक के भविष्य, नए बिजनेस मॉडल और शोध की नई दिशाओं पर गहन चर्चा का मंच प्रदान करेंगे।
आईआईटी दिल्ली के डीन (कॉरपोरेट रिलेशंस) प्रो. जयंत जैन ने कहा कि यह पहल अकादमिक और उद्योग जगत के बीच तालमेल को एक नई दिशा देगी। उनके अनुसार, इससे न केवल स्वदेशी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र बनाने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी।
आईआईटी दिल्ली का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय उद्योग तेज़ी से तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है और कंपनियों को शोध आधारित समाधान और प्रशिक्षित प्रतिभा की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता महसूस हो रही है। यह प्रोग्राम उद्योगों और अकादमिक संस्थानों को एक साझा मंच देने की दिशा में अहम पहल साबित हो सकता है।




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