
ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच CBSE ने कथित हैकिंग और सुरक्षा चूक से जुड़े सभी दावों का साफ तौर पर खंडन किया है। बोर्ड ने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस यूआरएल को लेकर सुरक्षा खामी का आरोप लगाया गया, वह असल मूल्यांकन पोर्टल नहीं था, बल्कि सिर्फ एक टेस्टिंग साइट थी जिसे आंतरिक ट्रायल के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
19 वर्षीय शोधकर्ता के दावों से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद तब चर्चा में आया जब 19 वर्षीय साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि उसने सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन पोर्टल में कई गंभीर तकनीकी कमजोरियां खोजी हैं। उसके अनुसार ये खामियां इतनी संवेदनशील थीं कि इनके आधार पर परीक्षकों के खातों में लॉग-इन करना और छात्रों के अंकों में बदलाव करना संभव था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुई निसर्ग की ब्लॉग पोस्ट के बाद मामला तेजी से बढ़ा और बोर्ड की डिजिटल सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगे। निसर्ग ने यह भी कहा कि उसने 25 फरवरी को ये खामियां खोजीं और सार्वजनिक करने से पहले संबंधित जानकारी भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल को भेजी थी।
तकनीकी खामियों की सूची भी साझा की
अपने ब्लॉग में निसर्ग ने ‘हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड’, क्लाइंट-साइड ओटीपी वेरिफिकेशन, पासवर्ड रीसेट सिस्टम की खामियां और ‘IDOR वल्नरेबिलिटी’ जैसी समस्याओं का दावा किया। उसके अनुसार ये कमियां किसी भी अनधिकृत उपयोगकर्ता को सिस्टम तक पहुंच दिलाने में सक्षम थीं।
बोर्ड का जवाब — “दावा भ्रामक, पोर्टल असली नहीं था”
CBSE ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा कि जिस यूआरएल को आधार बनाकर आरोप लगाए गए, वह वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली का हिस्सा ही नहीं था। वह केवल एक परीक्षण साइट थी जहाँ उदाहरण स्वरूप डेटा रखा गया था।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि
– वास्तविक कॉपी मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया गया पोर्टल अलग है
– उस पोर्टल में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक दर्ज नहीं की गई
– टेस्टिंग साइट पर न तो असली अंक मौजूद थे और न ही छात्रों का कोई संवेदनशील डेटा
बोर्ड ने सभी हितधारकों को भरोसा दिलाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल हो रहे वास्तविक प्लेटफ़ॉर्म पर मजबूत सुरक्षा उपाय लागू हैं।
हालांकि, सीबीएसई की स्पष्टीकरण पोस्ट पर निसर्ग ने सवाल उठाते हुए लिखा कि अगर यह सिर्फ टेस्ट डेटा था, तो वह प्रोडक्शन यूज़र डेटा के साथ लॉग-इन कैसे कर पाया? उसने दावा किया कि उसके पास इस प्रक्रिया की स्क्रीन रिकॉर्डिंग और CERT-In द्वारा मेल की पुष्टि के सबूत मौजूद हैं।
पहले भी उठे थे सवाल
मूल्यांकन प्रणाली को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही एक तकनीकी गलती के कारण दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव को किसी दूसरे छात्र की भौतिकी उत्तरपुस्तिका भेज दी गई थी। बाद में बोर्ड ने गलती सुधार दी थी। इस साल सीबीएसई ने मूल्यांकन में तेजी और पारदर्शिता लाने के लिए ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली लागू की थी, लेकिन लगातार सामने आ रही तकनीकी दिक्कतों ने इसे प्रश्नों के घेरे में ला दिया है।
IIT विशेषज्ञ कर रहे हैं जांच
यह मामला अब IIT Madras और IIT Kanpur के विशेषज्ञों को सौंप दिया गया है। IIT Madras के निदेशक वी. कामाकोटी के अनुसार टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है—चाहे वह तकनीकी खामी हो, सिस्टम फेलियर या संभावित साइबर अटैक। उन्होंने यह भी कहा कि “पोर्टल पिछले 72 घंटों से स्थिर है।”
संसदीय समिति की बैठक 2 जून को
शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने भी इस पूरे मामले को संज्ञान में लिया है। कक्षा 12 के परीक्षा परिणामों में आई गड़बड़ियों और OSM प्रणाली की समीक्षा के लिए समिति ने 2 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के अधिकारियों को तलब किया है।
पेमेंट गेटवे में सुधार की तैयारी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सीबीएसई के पेमेंट गेटवे सिस्टम में सुधार हेतु चार सरकारी बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठक की है। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसा मजबूत पेमेंट प्रोटोकॉल तैयार किया जाए, जिससे
– भुगतान समय पर हो
– तकनीकी समस्याओं का तुरंत समाधान मिले
– अतिरिक्त या असफल भुगतान होने पर छात्रों को स्वतः रिफंड मिल सके




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