
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस वर्ष पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सवाल उठने लगे हैं। मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों की शिकायतों के बाद अब सोशल मीडिया पर प्रभावित छात्रों को ग्रेस मार्क्स देने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
मामला तब और चर्चा में आ गया जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि नई मूल्यांकन व्यवस्था में कुछ कमियां सामने आई हैं और इससे छात्रों को परेशानी हुई है। उन्होंने CBSE अधिकारियों के साथ बैठक के बाद कहा कि बोर्ड को मिली शिकायतों की समीक्षा की जा रही है।
पहली बार लागू हुई थी ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली
CBSE ने 2026 की बोर्ड परीक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से पहली बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया था। इसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों के सामने डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया गया और मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यम से किया गया।
बोर्ड का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाना था। हालांकि, परिणाम जारी होने के बाद कई परीक्षकों और छात्रों ने इस व्यवस्था में तकनीकी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया है।
छात्रों ने उठाए कम अंक मिलने के सवाल
रिजल्ट घोषित होने के बाद कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक मिले हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और अतिरिक्त अंक देने की मांग कर रहे हैं।
कुछ छात्रों का कहना है कि यदि मूल्यांकन के दौरान तकनीकी खामियों के कारण उत्तर सही तरीके से नहीं देखे गए, तो इसका सीधा असर उनके परिणामों पर पड़ा हो सकता है। इसी आधार पर कई छात्र 15 से 20 ग्रेस मार्क्स देने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, अभी तक CBSE की ओर से ग्रेस मार्क्स देने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
परीक्षकों ने भी जताई थीं तकनीकी दिक्कतें
मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े कुछ शिक्षकों और परीक्षकों ने भी तकनीकी चुनौतियों की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के पन्ने स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे थे। कुछ मामलों में उत्तर अधूरे दिखाई दिए, जबकि लंबे उत्तरों को स्क्रीन पर पढ़ने में भी कठिनाई आने की बात कही गई।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कैनिंग या डिस्प्ले से जुड़ी समस्याएं व्यापक स्तर पर हुई हैं, तो इसकी जांच आवश्यक है ताकि छात्रों के हित प्रभावित न हों।
क्या होते हैं ग्रेस मार्क्स?
ग्रेस मार्क्स ऐसे अतिरिक्त अंक होते हैं जो विशेष परिस्थितियों में छात्रों को राहत देने के लिए दिए जाते हैं। आमतौर पर प्रश्नपत्र में त्रुटि, परीक्षा संचालन में बाधा या मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी असाधारण समस्या की स्थिति में बोर्ड इस विकल्प पर विचार कर सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रेस मार्क्स का फैसला तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। बिना स्पष्ट प्रमाण के सभी छात्रों को अतिरिक्त अंक देना मूल्यांकन प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।
लगभग 18 लाख छात्रों की कॉपियों का हुआ डिजिटल मूल्यांकन
इस वर्ष CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा में करीब 18 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन OSM प्रणाली के माध्यम से किया गया। बोर्ड के अनुसार लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं के करीब 40 करोड़ पन्नों को स्कैन कर डिजिटल मूल्यांकन के लिए उपलब्ध कराया गया था।
इतने बड़े स्तर पर डिजिटल मूल्यांकन भारतीय स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी तैयारियां और गुणवत्ता नियंत्रण बेहद जरूरी होते हैं।
री-चेकिंग और वेरिफिकेशन का मिलेगा मौका
छात्रों की चिंताओं को देखते हुए CBSE ने पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रिया फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने 1 जून से वेरिफिकेशन और री-चेकिंग पोर्टल खोलने की घोषणा की है, जिससे छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच दोबारा कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन छात्रों को अपने अंकों को लेकर संदेह है, वे आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से वेरिफिकेशन और उत्तर पुस्तिका की समीक्षा के विकल्प का उपयोग करें।
ग्रेस मार्क्स पर बंटी हुई है राय
ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लेकर जारी बहस के बीच ग्रेस मार्क्स के मुद्दे पर भी अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में तकनीकी खामियां प्रमाणित होती हैं, तो प्रभावित छात्रों को उचित राहत दी जानी चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, कई शिक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सभी छात्रों को समान रूप से अतिरिक्त अंक देना उचित नहीं होगा। उनका तर्क है कि इससे मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया और निष्पक्ष मूल्यांकन की अवधारणा प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर CBSE की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। बोर्ड की जांच और समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तकनीकी शिकायतों का अंतिम समाधान किस रूप में निकलेगा और क्या ग्रेस मार्क्स का विकल्प अपनाया जाएगा या नहीं।




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