
कार्यालयों में अक्सर ऐसे कर्मचारी देखने को मिलते हैं जो समय पर आते हैं, अपने निर्धारित कार्य पूरे करते हैं और फिर अतिरिक्त जिम्मेदारियों से दूरी बनाए रखते हैं। वे नौकरी छोड़ते नहीं हैं, लेकिन संगठन के लिए अपेक्षा से अधिक योगदान देने की इच्छा भी नहीं दिखाते। कार्यस्थलों पर तेजी से बढ़ती इस प्रवृत्ति को क्वाइट क्विटिंग (Quiet Quitting) कहा जाता है। अब एक नए शोध ने इस व्यवहार के पीछे केवल काम का दबाव या खराब कार्य वातावरण ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व से जुड़े कारणों की भी ओर संकेत किया है।
अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका Acta Psychologica में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कुछ विशेष व्यक्तित्व लक्षण कर्मचारियों में क्वाइट क्विटिंग की संभावना बढ़ा सकते हैं। यह शोध मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) से जुड़ी प्रोफेसर तृप्ति सिंह और शोधकर्ता हनफिया रहमान द्वारा किया गया है।
शोध में पाया गया कि जिन लोगों में नार्सिसिज्म (Narcissism) और साइकोपैथी (Psychopathy) से जुड़े लक्षण अधिक होते हैं, उनमें संगठन से भावनात्मक दूरी बनाने और केवल न्यूनतम अपेक्षित कार्य करने की प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है। नार्सिसिस्ट व्यक्तित्व वाले लोग अक्सर स्वयं को दूसरों से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि साइकोपैथी से जुड़े लक्षण रखने वाले लोग कई बार दूसरों की भावनाओं और जरूरतों के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।
अध्ययन के अनुसार ऐसे व्यक्तियों में विशेष अधिकार पाने की भावना अधिक विकसित हो सकती है। समय के साथ वे अपने व्यवहार के नैतिक प्रभावों को नजरअंदाज करने लगते हैं, जिससे संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कमजोर पड़ सकती है। परिणामस्वरूप वे केवल उतना ही काम करने तक सीमित रह जाते हैं जितना नौकरी बनाए रखने के लिए जरूरी होता है।
यह शोध भारत के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 402 वरिष्ठ प्रबंधकों पर आधारित है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के पेशेवरों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं और कर्मचारियों के कार्य व्यवहार के बीच संबंधों का विश्लेषण किया।
अध्ययन में नार्सिसिज्म और साइकोपैथी का क्वाइट क्विटिंग से स्पष्ट संबंध पाया गया, जबकि मैकियावेलियनिज्म (Machiavellianism) यानी लक्ष्य हासिल करने के लिए छल, धोखे या अनैतिक तरीकों को स्वीकार्य मानने वाली प्रवृत्ति का इस व्यवहार से कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निष्कर्ष संगठनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। आमतौर पर कर्मचारी जुड़ाव में कमी को केवल कार्यभार, वेतन या प्रबंधन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह शोध बताता है कि व्यक्तित्व संबंधी कारक भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि कंपनियों को कर्मचारियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए और उनकी प्रतिक्रिया को गंभीरता से लेना चाहिए। इसके साथ ही नैतिक मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण, सकारात्मक कार्य संस्कृति और व्यक्तित्व मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं को भी संस्थागत स्तर पर महत्व दिया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों और संगठन के बीच बेहतर जुड़ाव विकसित हो सकता है।
क्या है क्वाइट क्विटिंग?
क्वाइट क्विटिंग का अर्थ नौकरी छोड़ना नहीं है। इसका मतलब है कि कर्मचारी केवल वही काम करें जो उनके पद और जिम्मेदारियों के दायरे में आता है। वे अतिरिक्त कार्य, नए प्रोजेक्ट या अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेने से बचते हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह शब्द वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना है, खासकर ऐसे समय में जब कर्मचारी कार्य और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन की मांग कर रहे हैं।
नया शोध इस बहस में एक नया आयाम जोड़ता है। यह बताता है कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों के व्यवहार को समझने के लिए केवल बाहरी परिस्थितियों ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।




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