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भारत को ग्लोबल टैलेंट हब बनाने की तैयारी, उभरते स्किल गैप को पाटने के लिए MSDE और WEF ने बनाई रणनीति

भारत को ग्लोबल टैलेंट हब बनाने की तैयारी, उभरते स्किल गैप को पाटने के लिए MSDE और WEF ने बनाई रणनीति

भारत को ग्लोबल टैलेंट हब बनाने की तैयारी, उभरते स्किल गैप को पाटने के लिए MSDE और WEF ने बनाई रणनीति

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) के सहयोग से नई दिल्ली में इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर (ISA) की पहली उच्च स्तरीय राउंडटेबल बैठक आयोजित की। इस बैठक में नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इसका उद्देश्य उभरते कौशल अंतर (स्किल गैप) को दूर करने और भारत के कार्यबल को भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए तैयार करने की रणनीति तैयार करना था।

‘फ्रॉम इनसाइट टू एक्शन: क्लोजिंग स्किल्स गैप्स फॉर ग्रोथ’ विषय पर आयोजित इस बैठक में भारत के कौशल विकास तंत्र को बदलती श्रम बाजार की मांगों के अनुरूप बनाने और देश को वैश्विक प्रतिभा केंद्र (ग्लोबल टैलेंट हब) के रूप में मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई।

क्या है इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर?

इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर की घोषणा जनवरी 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद की गई थी। यह पहल कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है और विश्व आर्थिक मंच के ग्लोबल एक्सेलेरेटर्स नेटवर्क का हिस्सा है।

इस पहल का उद्देश्य सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है, ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और ग्रीन इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए कार्यबल को तैयार किया जा सके।

कौशल विकास और रोजगार क्षमता पर रहा फोकस

बैठक की सह-अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री Jayant Chaudhary, शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री Sukanta Majumdar, Shobana Kamineni और Sanjiv Bajaj ने की। बैठक में Mirek Dušek भी शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति वैश्विक विकास की बड़ी ताकत बन सकती है, बशर्ते कौशल विकास को बदलती तकनीकी, औद्योगिक और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप बनाए रखा जाए। उन्होंने कहा कि इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर सहयोग का एक नया मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थान और वैश्विक संगठन केवल चुनौतियों पर चर्चा नहीं करते, बल्कि मिलकर समाधान भी तैयार करते हैं।

शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत

चर्चा का एक प्रमुख विषय शिक्षा और रोजगार क्षमता (Employability) के बीच संबंध को मजबूत बनाना रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी बदलावों के कारण उद्योगों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं, ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और बदलते माहौल के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता भी प्रदान करनी होगी।

सुकांत मजूमदार ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास का भविष्य सीखने और रोजगार के अवसरों के बीच गहरे एकीकरण में निहित है। उनका मानना है कि छात्रों को जीवनभर सीखते रहने की मानसिकता विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि वे बदलती तकनीकों और उद्योगों की मांगों के अनुरूप खुद को तैयार रख सकें।

उभरते क्षेत्रों में स्किल गैप पर चर्चा

राउंडटेबल में उन प्रमुख कारकों पर विचार किया गया जो भारत के श्रम बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। प्रतिभागियों ने उभरते क्षेत्रों में कौशल की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदमों, कौशल विकास के लिए वित्तीय मॉडल और कार्यबल की तैयारी को बेहतर बनाने के उपायों पर भी चर्चा की।

वैश्विक कार्यबल के भविष्य में भारत की बड़ी भूमिका

विश्व आर्थिक मंच की प्रबंध निदेशक Saadia Zahidi ने कहा कि भारत वैश्विक कार्यबल के भविष्य को आकार देने की मजबूत स्थिति में है। हालांकि, इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक होगा, ताकि कौशल विकास प्रणाली आर्थिक और तकनीकी बदलावों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर

बैठक के अंत में सभी हितधारकों ने संरचित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से कार्यबल परिवर्तन को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें उभरती तकनीकों, कौशल विकास के वित्तपोषण और समावेशी विकास को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी।

बैठक से प्राप्त सुझाव इंडिया स्किल्स एक्सेलेरेटर के कार्यान्वयन रोडमैप को तैयार करने और भविष्य की कार्यबल विकास रणनीतियों को दिशा देने में मदद करेंगे।

प्रमुख संस्थानों की रही भागीदारी

इस कार्यक्रम में Apollo Hospitals, Bajaj Finserv, JSW Group, Mahindra Group, RP-Sanjiv Goenka Group, Tata Consultancy Services, Wipro, Reliance Foundation, ReNew, IBM India और Reliance Industries सहित कई प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

इसके अलावा All India Council for Technical Education, University Grants Commission, Central Board of Secondary Education, National Council for Vocational Education and Training, National Skill Development Corporation, Confederation of Indian Industry और Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry समेत कई संस्थानों के प्रतिनिधि भी इस चर्चा का हिस्सा बने।

Asmita Sarkar

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