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सिर्फ STEM में दाखिला काफी नहीं, महिलाओं को चाहिए नेटवर्क, फंडिंग और भरोसे का इकोसिस्टम

सिर्फ STEM में दाखिला काफी नहीं, महिलाओं को चाहिए नेटवर्क, फंडिंग और भरोसे का इकोसिस्टम

सिर्फ STEM में दाखिला काफी नहीं, महिलाओं को चाहिए नेटवर्क, फंडिंग और भरोसे का इकोसिस्टम

भारत में STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अक्सर सफलता की कहानी के रूप में पेश की जाती है। आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में लड़कियां इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और साइंस जैसे क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह भागीदारी तकनीकी नेतृत्व और उद्यमिता में भी उसी गति से बदल रही है?

सच्चाई यह है कि किसी महिला के लिए STEM की पढ़ाई पूरी करना और एक सफल टेक स्टार्टअप खड़ा करना दो बिल्कुल अलग चुनौतियां हैं। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भले ही दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इकोसिस्टम में शामिल हो, लेकिन महिलाओं के लिए आइडिया से लेकर बड़े व्यवसाय तक का सफर अब भी आसान नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों में महिला उद्यमियों ने यह साबित किया है कि प्रतिभा और नवाचार किसी एक लिंग की बपौती नहीं हैं। डीप टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, हेल्थटेक और एग्रीटेक जैसे क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इसके बावजूद जब बात निवेश, नेटवर्किंग, बाजार तक पहुंच और नेतृत्व के अवसरों की आती है, तो चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

दरअसल, समस्या प्रतिनिधित्व की कमी भर नहीं है। कई बार महिलाओं के पास बेहतरीन विचार होते हैं, लेकिन उन्हें सही मेंटर, निवेशक या उद्योग संपर्क नहीं मिल पाते। स्टार्टअप की दुनिया में केवल अच्छा उत्पाद होना पर्याप्त नहीं होता। सही लोगों तक पहुंच, शुरुआती ग्राहकों का भरोसा, बाजार की समझ और अनुभवी मार्गदर्शन भी उतना ही जरूरी होता है। यही वह क्षेत्र है जहां कई महिला उद्यमी पीछे छूट जाती हैं।

आज जरूरत इस बात की नहीं है कि महिलाओं को सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर में आने के लिए प्रेरित किया जाए। जरूरत इस बात की है कि उनके लिए ऐसा इकोसिस्टम बनाया जाए जो उनके विचारों को व्यवसाय में बदलने में मदद कर सके। मजबूत मेंटरशिप, निवेश तक आसान पहुंच, पेशेवर नेटवर्क और उद्योग सहयोग महिलाओं के लिए अवसरों के नए दरवाजे खोल सकते हैं।

महिला नेतृत्व का महत्व केवल लैंगिक समानता तक सीमित नहीं है। विविधता किसी भी उद्योग को बेहतर बनाती है। जब अलग-अलग सामाजिक और पेशेवर पृष्ठभूमि के लोग निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं, तो नवाचार भी अधिक प्रभावी और समावेशी होता है। यही कारण है कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां और निवेशक आज विविध नेतृत्व को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के रूप में देख रहे हैं।

एक और महत्वपूर्ण पहलू दृश्यता का है। भारत में सफल महिला उद्यमियों की कहानियां अभी भी उतनी प्रमुखता से सामने नहीं आतीं जितनी आनी चाहिए। जब छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां किसी महिला को तकनीकी स्टार्टअप का नेतृत्व करते हुए देखती हैं, तो उनके लिए भी संभावनाओं के नए रास्ते खुलते हैं। प्रेरणा अक्सर सफलता की कहानियों से ही जन्म लेती है।

यह भी याद रखना होगा कि तकनीक अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ ग्रामीण भारत में भी महिलाएं उद्यमिता के नए अवसर तलाश रही हैं। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधन और वित्तीय सहयोग मिले, तो वे स्थानीय समस्याओं के समाधान तैयार कर सकती हैं और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

भारत आज डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय में महिलाओं की भूमिका केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में लाना होगा। इसके लिए एक-दो कार्यक्रम या अभियान काफी नहीं होंगे। निरंतर समर्थन, संस्थागत सहयोग और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होगी।

अंततः सवाल यह नहीं है कि महिलाएं टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप की दुनिया में सफल हो सकती हैं या नहीं। उन्होंने यह क्षमता पहले ही साबित कर दी है। असली सवाल यह है कि क्या हमारा इकोसिस्टम उन्हें उतने ही अवसर और संसाधन देने के लिए तैयार है, जितने उनके पुरुष समकक्षों को मिलते हैं। यदि इसका जवाब ‘हां’ बनता है, तो भारत की अगली बड़ी तकनीकी क्रांति में महिलाओं की भूमिका केवल सहभागी की नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता की होगी।

Asmita Sarkar

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