
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। 21 जून को होने वाली परीक्षा के प्रश्नपत्र देशभर के परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पहली बार वायुसेना, सेना, अर्द्धसैनिक बलों और कई केंद्रीय मंत्रालयों की संयुक्त व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्रों को दिल्ली से देश के 18 प्रमुख स्थानों तक भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टरों के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। इसके बाद सेना के लॉजिस्टिक केंद्रों से इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच 551 परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा। पूरे अभियान की निगरानी केंद्र सरकार के उच्च स्तर पर की जा रही है।
पेपर लीक रोकने के लिए सरकारी तंत्र की पूरी भागीदारी
पिछले वर्षों में परीक्षा सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद इस बार प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उनके वितरण तक की पूरी प्रक्रिया में केवल सरकारी संस्थानों और अधिकारियों को शामिल किया गया है। सरकार के बाहर किसी निजी एजेंसी या व्यक्ति को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्रों को सरकारी प्रोफेसरों और वरिष्ठ शिक्षकों की मदद से तैयार किया गया है। इन्हें हिंदी और अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। अनुवाद प्रक्रिया में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा विकसित भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी का भी उपयोग किया गया है ताकि विभिन्न भाषाओं में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
बजट जैसी गोपनीय प्रक्रिया में तैयार हुए प्रश्नपत्र
सूत्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को उसी स्तर की गोपनीयता के साथ संचालित किया गया है, जैसी केंद्रीय बजट तैयार करने के दौरान अपनाई जाती है। इस कार्य में उन विशेषज्ञ टीमों की कार्यप्रणाली का भी अनुसरण किया गया जो वित्त मंत्रालय के बजट निर्माण से जुड़ी रहती हैं।
देशभर के लिए लगभग 23 लाख प्रश्नपत्र छापे जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को अत्यधिक गोपनीय वातावरण में पूरा किया गया है।
लॉजिस्टिक सेंटर से परीक्षा केंद्र तक रहेगी GPS निगरानी
प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में शिक्षा मंत्रालय, डाक विभाग, रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। समिति सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और कैबिनेट सचिवालय को रिपोर्ट करेगी।
वायुसेना के हेलिकॉप्टर या विमान से प्रश्नपत्र उतरने के बाद उन्हें विशेष स्टील बॉक्स में सेना के लॉजिस्टिक केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। वहां से डाक विभाग और सेना के वाहनों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा। इन सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम और लाइव कैमरा निगरानी की व्यवस्था की जा रही है, जिससे हर गतिविधि पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सके।
पासवर्ड से खुलेंगे स्टील बॉक्स
परीक्षा शुरू होने तक प्रश्नपत्रों वाले स्टील बॉक्स सेना के जवानों की निगरानी में रहेंगे। निर्धारित समय पर दिल्ली स्थित नियंत्रण केंद्र से अनुमति मिलने के बाद ही बॉक्स खोले जा सकेंगे।
इसके लिए विशेष डिजिटल पासवर्ड प्रणाली लागू की गई है। पासवर्ड समय और तारीख के अनुसार बदलते रहेंगे ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत पहुंच को रोका जा सके। बॉक्स खोलने के दौरान परीक्षा केंद्रों पर नियुक्त अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। उन्हें फोटो पहचान पत्र और निर्धारित पासवर्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।
पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार का उद्देश्य इस बार NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और विवादों से मुक्त बनाना है। प्रश्नपत्र निर्माण, अनुवाद, परिवहन और वितरण के हर चरण में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। सरकार को उम्मीद है कि इन कड़े इंतजामों से परीक्षा की विश्वसनीयता मजबूत होगी और अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा।
देशभर के लाखों छात्र 21 जून को होने वाली इस महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होंगे, जिसके परिणाम के आधार पर मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।




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