
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव चर्चा में है। हाल ही में हुई परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों को होने वाली परेशानियों के बीच स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि NEET UG परीक्षा साल में एक से अधिक बार आयोजित करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, समिति के सदस्यों ने कहा कि यदि परीक्षा किसी कारणवश रद्द हो जाती है या किसी छात्र का प्रदर्शन प्रभावित होता है, तो उसका पूरा शैक्षणिक वर्ष दांव पर लग जाता है। ऐसे में JEE Main की तर्ज पर NEET UG को साल में दो या तीन बार आयोजित करने का विकल्प छात्रों को राहत दे सकता है।
पेपर लीक विवाद पर हुई विस्तृत चर्चा
बुधवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने संसदीय समिति को NEET UG से जुड़े हालिया घटनाक्रम और जांच की स्थिति की जानकारी दी। बैठक में NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी और NMC के अध्यक्ष अभिजात सी. सेठ सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समिति ने परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर अधिकारियों के विचार भी सुने। बताया गया कि हाल के सप्ताहों में यह तीसरा अवसर था जब सरकारी अधिकारियों को इस मुद्दे पर संसदीय समिति के सामने उपस्थित होना पड़ा।
21 जून को प्रस्तावित री-एग्जाम पर कड़ी निगरानी
पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द की गई NEET UG परीक्षा के लिए 21 जून को पुनर्परीक्षा आयोजित की जानी है। इसके लिए NTA और केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाने की तैयारी की है ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या पेपर लीक की संभावना को रोका जा सके।
इस वर्ष NEET UG परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा, जिससे लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई।
समिति ने उठाए जवाबदेही से जुड़े सवाल
सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति के कई सदस्यों ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं अब एक बार की समस्या नहीं रह गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि बार-बार ऐसी घटनाएं होती हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। सदस्यों का मानना था कि केवल परीक्षा रद्द कर देना समाधान नहीं है, क्योंकि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से तैयारी की होती है।
पहले भी उठ चुकी है साल में दो बार परीक्षा कराने की मांग
NEET UG को साल में एक से अधिक बार आयोजित करने की मांग नई नहीं है। कई छात्र संगठन और अभ्यर्थी लंबे समय से इस व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे परीक्षा का दबाव कम होगा और छात्रों को प्रदर्शन सुधारने का दूसरा अवसर मिलेगा।
वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी घोषणा की थी कि NTA, JEE Main और NEET जैसी प्रवेश परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने की दिशा में काम करेगी। हालांकि यह व्यवस्था बाद में लागू नहीं हो सकी।
NMC ने पहले जताई थी व्यावहारिक कठिनाई
हालांकि NEET UG को साल में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अपनी व्यावहारिक चिंताएं भी सामने रख चुका है। वर्ष 2023 में आयोग ने कहा था कि मेडिकल कॉलेजों की MBBS सीटों का आवंटन एक केंद्रीकृत काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। ऐसे में साल में कई बार परीक्षा आयोजित करने से प्रवेश प्रक्रिया और सीट आवंटन को लेकर जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
क्या बदल सकती है NEET की परीक्षा व्यवस्था?
फिलहाल NEET UG साल में केवल एक बार आयोजित की जाती है और परीक्षा का स्कोर ही देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS तथा अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश का आधार बनता है। संसदीय समिति के सुझाव के बाद इस विषय पर चर्चा तेज हो सकती है, लेकिन किसी भी बदलाव के लिए NTA, NMC और केंद्र सरकार को प्रवेश प्रक्रिया, काउंसलिंग व्यवस्था और सीट आवंटन से जुड़े कई पहलुओं पर विचार करना होगा।
फिलहाल छात्रों की निगाहें 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा और उससे जुड़े प्रशासनिक इंतजामों पर टिकी हुई हैं। वहीं, साल में दो या तीन बार NEET UG आयोजित करने का प्रस्ताव आने वाले समय में देश की मेडिकल प्रवेश प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है।




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