
श्री खुशाल दास यूनिवर्सिटी (SKDU) ने यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (MMTTC), सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात के सहयोग से 50वें ऑनलाइन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ओरिएंटेशन एवं सेंसिटाइजेशन प्रोग्राम की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य शिक्षाविदों और अकादमिक समुदाय के बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रति जागरूकता और समझ को बढ़ावा देना है।
यह कार्यक्रम 21 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा और पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इसके माध्यम से देशभर के शिक्षक, शोधकर्ता और उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर आसानी से इसमें भाग ले सकेंगे।
यह एक फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम होगा, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख सिद्धांतों, सुधारों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार यह नीति बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन, अनुसंधान को बढ़ावा, नवाचार को प्रोत्साहन और परिणाम-आधारित शिक्षा के माध्यम से भारत के उच्च शिक्षा परिदृश्य को बदल रही है।
कार्यक्रम विशेष रूप से फैकल्टी सदस्यों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक प्रशासकों और उच्च शिक्षा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है, जो बदलते शिक्षा तंत्र और उसके शिक्षण, अधिगम तथा संस्थागत विकास पर पड़ने वाले प्रभावों को गहराई से समझना चाहते हैं।
इस पहल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें भागीदारी पूरी तरह निःशुल्क है। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पात्र प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस ओरिएंटेशन कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप पर सार्थक विचार-विमर्श को बढ़ावा देना और शिक्षकों को ऐसा ज्ञान प्रदान करना है, जिससे वे अपने संस्थानों में NEP 2020 की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
देशभर के विश्वविद्यालय और कॉलेज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप अपनी शैक्षणिक संरचनाओं को पुनर्गठित कर रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार के ओरिएंटेशन और सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इच्छुक प्रतिभागी आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक लिंक के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। उम्मीद की जा रही है कि यह कार्यक्रम विभिन्न विषयों के फैकल्टी सदस्यों और अकादमिक पेशेवरों को एक मंच पर लाएगा, जहां वे हाल के वर्षों के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षिक सुधारों में से एक पर सीखने और ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।




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