
भारत में सौर ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल रहा है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) की हालिया अखिल भारतीय रिपोर्ट के अनुसार, जिन परिवारों ने अपने घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किया है, उनके मासिक बिजली बिल में औसतन 71 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि सोलर सिस्टम लगाने के इच्छुक अधिकांश परिवारों के लिए बिजली खर्च में कमी सबसे बड़ा आकर्षण है।
यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी की गई। देशभर के 22 राज्यों के 308 जिलों में 17,000 से अधिक परिवारों पर किए गए इस सर्वेक्षण से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि भारत में घरेलू सौर ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है।
बिजली बिल में राहत बना सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट के अनुसार, सोलर सिस्टम लगाने की इच्छा रखने वाले 81 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य बिजली बिल कम करना है। बढ़ती बिजली खपत और ऊर्जा लागत के बीच रूफटॉप सोलर घरों के लिए दीर्घकालिक बचत का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी और आसान आवेदन प्रक्रिया ने भी इसकी लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पीएम सूर्य घर योजना से मिली नई रफ्तार
भारत में आवासीय रूफटॉप सोलर क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच इस क्षेत्र की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर (CAGR) लगभग 45 प्रतिशत रही। हालांकि, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के लागू होने के बाद 2024 से 2026 के दौरान यह वृद्धि दर बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के साथ-साथ लाखों परिवारों को बिजली खर्च से राहत देने में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा के सामने नई चुनौती
जहां एक ओर सौर ऊर्जा का विस्तार तेज हो रहा है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक अन्य रिपोर्ट ने भविष्य की चुनौतियों की ओर भी संकेत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि देश के कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को न्यूनतम 55 प्रतिशत क्षमता पर लगातार संचालित किया जाता है, तो वर्ष 2030-31 तक 68 से 115 गीगावाट तक अतिरिक्त बिजली उत्पादन की स्थिति पैदा हो सकती है।
ऐसी स्थिति में सौर और पवन ऊर्जा से उत्पादित बिजली को सीमित करने की आवश्यकता पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट ग्रिड और बेहतर बिजली प्रबंधन प्रणाली पर निवेश बढ़ाना जरूरी होगा, ताकि स्वच्छ ऊर्जा का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
चीन में सोलर उद्योग नई दिशा में
वैश्विक स्तर पर भी सौर ऊर्जा उद्योग बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता देश चीन वर्तमान में सालाना लगभग 1,000 गीगावाट सोलर पैनल उत्पादन क्षमता रखता है। हालांकि मांग और कीमतों में गिरावट के कारण कई निर्माता अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ते सोलर पैनलों की उपलब्धता दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है। वहीं ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के बीच सौर ऊर्जा की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
बैटरी और ऊर्जा भंडारण पर बढ़ रहा फोकस
सोलर पैनल बाजार में प्रतिस्पर्धा और कीमतों में गिरावट के बीच चीन की कई बड़ी कंपनियां अब ऊर्जा भंडारण यानी बैटरी कारोबार पर जोर दे रही हैं। डेटा सेंटरों की बढ़ती संख्या और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के कारण बैटरी की मांग लगातार बढ़ रही है।
इसी दिशा में चीन के सबसे बड़े एकल सौर ऊर्जा केंद्र से जुड़ी एक विशाल ऊर्जा भंडारण परियोजना का संचालन भी शुरू हो चुका है। इस परियोजना से हर वर्ष 450 गीगावाट-घंटे से अधिक सौर ऊर्जा के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा को अधिक स्थिर बनाने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत में रूफटॉप सोलर अब केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह आम परिवारों के लिए आर्थिक बचत का मजबूत विकल्प बन चुका है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने इस बदलाव को नई गति दी है। हालांकि भविष्य में बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए ऊर्जा भंडारण और ग्रिड ढांचे को मजबूत बनाना भी उतना ही जरूरी होगा। यदि यह संतुलन कायम रहा, तो भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।




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