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भारत और विदेश में 13 परिसरों के साथ NFSU बना फोरेंसिक शिक्षा का वैश्विक केंद्र

भारत और विदेश में 13 परिसरों के साथ NFSU बना फोरेंसिक शिक्षा का वैश्विक केंद्र

भारत और विदेश में 13 परिसरों के साथ NFSU बना फोरेंसिक शिक्षा का वैश्विक केंद्र

गुजरात के गांधीनगर स्थित National Forensic Sciences University (NFSU) ने फोरेंसिक विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय अब तक 96 देशों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दे चुका है और भारत तथा विदेशों में अपने 13 परिसरों का विस्तार कर चुका है। यह उपलब्धि NFSU को फोरेंसिक विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थान के रूप में स्थापित करती है।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, NFSU फोरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा, आपराधिक जांच और संबंधित विषयों में क्षमता विकास का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। यहां दुनिया के विभिन्न देशों से छात्र, पेशेवर और सरकारी अधिकारी प्रशिक्षण एवं शिक्षा प्राप्त करने के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे वैज्ञानिक जांच और फोरेंसिक विशेषज्ञता के क्षेत्र में भारत की भूमिका और मजबूत हुई है।

वर्ष 2009 में स्थापित NFSU को वर्ष 2020 में भारतीय संसद द्वारा “राष्ट्रीय महत्व का संस्थान” (Institution of National Importance) का दर्जा प्रदान किया गया था। इसे दुनिया का पहला और एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय माना जाता है जो विशेष रूप से फोरेंसिक विज्ञान और उससे जुड़े विषयों को समर्पित है। पिछले वर्षों में विश्वविद्यालय ने ऐसे विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित किए हैं जो शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को एक साथ जोड़ते हैं।

NFSU की अंतरराष्ट्रीय पहुंच में लगातार वृद्धि हुई है। विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक, प्रशिक्षण और पेशेवर विकास कार्यक्रमों में अब तक 96 देशों के प्रतिनिधि भाग ले चुके हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय 13 परिसरों का संचालन कर रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी शामिल हैं। साथ ही, संस्थान वैश्विक स्तर पर अपने विस्तार की नई संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।

शिक्षा और प्रशिक्षण के अलावा, विश्वविद्यालय ने फोरेंसिक नवाचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। NFSU ने कई स्वदेशी फोरेंसिक तकनीकों का विकास किया है और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अनुसंधान परियोजनाओं तथा मोबाइल फोरेंसिक जांच इकाइयों के माध्यम से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहयोग प्रदान कर रहा है।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि संस्थान फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित अनुसंधान केंद्रों और उद्योग सहयोग पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कई तकनीकें और उत्पाद अब आपराधिक न्याय प्रणाली और सुरक्षा एजेंसियों में उपयोग किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आपराधिक जांच, साइबर अपराध की पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा में वैज्ञानिक तरीकों के बढ़ते उपयोग के कारण दुनिया भर में फोरेंसिक विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। NFSU का विस्तार इसी वैश्विक आवश्यकता को दर्शाता है। साथ ही, यह प्रगति उभरते वैज्ञानिक क्षेत्रों में भारत को ज्ञान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप भी है।

फोरेंसिक शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में NFSU की उपलब्धियां न केवल भारत के लिए गौरव का विषय हैं, बल्कि यह देश को वैश्विक फोरेंसिक विशेषज्ञता के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।

Asmita Sarkar

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