
विदेश में पढ़ाई करना और वहीं नौकरी हासिल कर स्थायी रूप से बस जाना लंबे समय से लाखों भारतीय छात्रों का सपना रहा है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के अन्य देशों में उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं। लेकिन अब यह पारंपरिक सोच बदलती दिखाई दे रही है। विदेशी डिग्री हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों को मनचाही नौकरी नहीं मिल रही है, जिसके चलते वे भारत में रोजगार के अवसर तलाशने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
इस बदलाव की ओर हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने ध्यान आकर्षित किया है। ब्रिटेन स्थित छात्र करियर प्लेटफॉर्म Student Circus की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के बीच भारत में नौकरी तलाशने की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। यह केवल अस्थायी बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक रोजगार बाजार में आ रहे बड़े बदलावों का संकेत माना जा रहा है।
भारत में नौकरी तलाशने की रुचि में बड़ा उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 और 2024 के बीच भारत में नौकरी खोजने से जुड़ी गतिविधियों में 89 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती बढ़ोतरी के बाद भी यह रुझान कमजोर नहीं पड़ा। इसके बजाय भारतीय छात्रों का भारत लौटकर करियर बनाने का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल विदेशों में बढ़ती चुनौतियों की प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि भारतीय नौकरी बाजार के प्रति बढ़ते विश्वास का भी संकेत है।
विदेश में नौकरी पाना क्यों हो रहा मुश्किल?
कई वर्षों तक यह माना जाता रहा कि विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए वहीं नौकरी हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है। यही वजह थी कि लाखों भारतीय छात्र हर साल भारी फीस खर्च कर विदेशी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते रहे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में स्थिति काफी बदल गई है।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप के कई देशों में इमिग्रेशन नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हुए हैं। अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाले OPT (Optional Practical Training) कार्यक्रम को लेकर लगातार बहस चल रही है। वहीं ब्रिटेन ने पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं और स्किल्ड वर्कर वीजा के लिए वेतन सीमा बढ़ाई है।
इसके अलावा यूरोप के कई देशों में आर्थिक दबाव और धीमी विकास दर के कारण रोजगार बाजार प्रभावित हुआ है। कंपनियों में भर्ती की गति कम हुई है और प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। तकनीकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग का असर भी नौकरियों पर देखा जा रहा है, खासकर एंट्री-लेवल पदों पर।
कुछ देशों में विदेशी छात्रों और प्रवासी कर्मचारियों को लेकर बदलते सामाजिक और राजनीतिक माहौल ने भी छात्रों की चिंताएं बढ़ाई हैं।
भारत अब केवल बैकअप विकल्प नहीं
एक समय था जब विदेश में पढ़ाई करने वाले अधिकांश भारतीय छात्रों के लिए भारत लौटना केवल एक वैकल्पिक योजना माना जाता था। प्राथमिक लक्ष्य पढ़ाई पूरी करने के बाद उसी देश में नौकरी हासिल करना होता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार, वैश्विक कंपनियों का निवेश और नई तकनीकी नौकरियों के बढ़ते अवसर छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं। कंसल्टिंग, डेटा एनालिटिक्स, वित्तीय सेवाएं, बिजनेस मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक भूमिकाओं में युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय छात्र अब केवल समझौते के तौर पर भारत नहीं लौट रहे हैं, बल्कि वे यहां उपलब्ध अवसरों को गंभीरता से देख रहे हैं। देश में करियर ग्रोथ, बेहतर वेतन पैकेज और तेजी से विकसित हो रहे उद्योग क्षेत्रों ने भारत को एक मजबूत करियर डेस्टिनेशन बना दिया है।
छात्रों की बदल रही सोच
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय छात्रों की महत्वाकांक्षाएं कम नहीं हुई हैं। बदलाव केवल इतना है कि वे अब अवसरों का मूल्यांकन अधिक व्यावहारिक तरीके से कर रहे हैं। जहां पहले विदेशी नौकरी को सफलता का अंतिम लक्ष्य माना जाता था, वहीं अब कई छात्र भारत में उपलब्ध संभावनाओं को भी समान महत्व दे रहे हैं।
भारत का रोजगार बाजार लगातार विकसित हो रहा है और वैश्विक कंपनियां भी यहां अपने संचालन का विस्तार कर रही हैं। ऐसे में विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए भारत अब केवल “प्लान B” नहीं, बल्कि एक मजबूत और आकर्षक करियर विकल्प बनकर उभर रहा है।
विदेशी शिक्षा का आकर्षण अभी भी बना हुआ है, लेकिन नौकरी और करियर के मामले में भारतीय छात्रों की प्राथमिकताओं में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में यह रुझान और मजबूत हो सकता है, खासकर यदि भारत में रोजगार और नवाचार के अवसर इसी गति से बढ़ते रहे।




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