
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) और केरल कलामंडलम (Kerala Kalamandalam) का लक्ष्य एक ऐसा एआई-सक्षम उपकरण विकसित करना है जो कथकली के कला रूप की अर्थपूर्ण व्याख्या कर सके। इस परियोजना के ज़रिये कथकली के प्रति लोगों की रूचि और इस कला को लेकर गहरी सराहना को बढ़ावा देना अंतिम मकसद है।
जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की रचनात्मकता को लेकर कई कलाकारों में अब भी संदेह व्याप्त है, वहीं केरल में कलाकारों और प्रोग्रामरों के सहयोग से वहाँ के शास्त्रीय कलारूप- कथकली नृत्य के प्रति दर्शकों की रूचि और समझ को बढ़ाने के लिए एक मशीनी भाषा तैयार की जा रही है। इस मकसद से कि एक एआई-सक्षम उपकरण इस कला रूप की नए तरह से अर्थपूर्ण व्याख्या प्रदान कर सके और कथकली को लेकर लोगों की गहरी सराहना को बढ़ावा मिले।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान और केरल कलामंडलम, त्रिशूर के सहयोग वाली कोट्टायम में इस परियोजना के एक हिस्से के रूप में शोधकर्ता कथकली की 24 मौलिक मुद्राओं को एक कंप्यूटर में एन्कोड कर रहे हैं, जिस पर नृत्य-नाटक परंपरा आधारित है। तत्पश्चात इसका सांख्यिकीय विश्लेषण किया जाएगा। इस परियोजना का नेतृत्व आईआईआईटी की सहायक प्रोफेसर नंदिनी वारियर कर रही है।
परियोजना को संचालित करने वाले शोधकर्ताओं में से एक, मनु माधवन, इसे कला के रूप को दर्शकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हैं। वह कहते हैं, एक हाथ या दोनों हाथों से प्रदर्शन करने में सक्षम मुद्राएं सूक्ष्म अर्थ व्यक्त करती हैं जो प्रदर्शन के संदर्भ के आधार पर भिन्न हो सकती हैं।
मनु माधवन का कहना है कि “हमने कलामंडलम से प्राप्त छवियों का उपयोग करके मुद्राओं की पहचान पहले ही पूरी कर ली है और वर्तमान में डेटासेट को और समृद्ध करने के लिए लघु वीडियो एकत्र कर रहे हैं। अंतिम चरण में, सिस्टम वास्तविक समय में विभिन्न भाषाओं में व्याख्याएं उत्पन्न करना शुरू कर देगा और आउटपुट को उपशीर्षक के रूप में प्रदान करेगा।”
यानी कथकली का जब कोई प्रदर्शन होगा, तो ये उपशीर्षक आसपास की स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाएंगे। माधवन कहते हैं, यह परियोजना विदेशी आगंतुकों के बीच कथकली को बढ़ावा देने में भी अपनी भूमिका के कारण महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, कथकली के गुरुओ द्वारा युवा कलाकारों को प्रशिक्षित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।
परियोजना में शामिल कलामंडलम विश्वविद्यालय में कथकली के सहायक प्रोफेसर अरुण वारियर कहते हैं कि कथकली, जिसमें हाथ, चेहरे और पूरे शरीर का उपयोग करके जटिल इशारे तक शामिल हैं, को समझना अब तक एक खोज का विषय रहा है। पहले लोग इसके लिए अक्सर प्रदर्शन को बार-बार देखने और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन पर भरोसा करते रहे हैं, अब उन्हें इसके लिए एक नया सहयोगी मिलेगा।
वह सवाल करते हैं कि “कथा से परे, कथकली प्रदर्शन की सूक्ष्मताएं काफी हद तक दर्शकों की धारणा पर छोड़ दी जाती हैं, लेकिन इससे कभी-कभी असली समझ पैदा करने के व्यवधान हो सकता है। यदि एआई के साथ जुड़ने से किसी प्रदर्शन की गहरी समझ प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है, तो इसे क्यों न अपनाया जाए?”




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