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शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, मानव मूल्यों और शिक्षकों की भूमिका पर रहा जोर

शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, मानव मूल्यों और शिक्षकों की भूमिका पर रहा जोर

शिक्षा में AI के बढ़ते इस्तेमाल पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, मानव मूल्यों और शिक्षकों की भूमिका पर रहा जोर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया भर में शिक्षा के क्षेत्र को तेजी से बदल रहा है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए दक्षिण-पूर्वी यूरोप के 80 से अधिक शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने बोस्निया और हर्जेगोविना की राजधानी सारायेवो में आयोजित एक क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य यह समझना था कि AI जैसी नई तकनीकों को कक्षाओं में किस तरह शामिल किया जाए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर हो, लेकिन मानव मूल्य, शैक्षणिक ईमानदारी और विद्यार्थियों का हित भी सुरक्षित रहे।

इस सम्मेलन का विषय था “AI and Education – Challenges and Perspectives”। इसमें बोस्निया और हर्जेगोविना, क्रोएशिया, सर्बिया और स्लोवेनिया के शिक्षक, शिक्षा विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए।

इस कार्यक्रम का आयोजन कैथोलिक स्कूल सेंटर सेंट जोसेफ ने किया था। सम्मेलन को यूनेस्को (UNESCO), यूनिसेफ (UNICEF), फ्रेंच इंस्टीट्यूट और क्रोएशियन कल्चरल सोसाइटी नेप्रेडाक का सहयोग मिला।

AI से शिक्षा में नए अवसर, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

आज AI शिक्षा के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इससे व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पढ़ाई (Personalized Learning), बेहतर अध्ययन सामग्री और प्रशासनिक कार्यों में तेजी जैसे कई फायदे मिल रहे हैं। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, नैतिक उपयोग और शैक्षणिक ईमानदारी जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आ रहे हैं।

इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए यह सम्मेलन एक साझा मंच बना, जहां विशेषज्ञों ने AI आधारित शिक्षा के अवसरों और संभावित जोखिमों का गंभीरता से विश्लेषण किया।

चार दिनों तक चले सम्मेलन में AI के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा, डिजिटल तकनीकों के जिम्मेदार इस्तेमाल, विद्यार्थियों के मानसिक और शैक्षणिक हितों की सुरक्षा तथा AI आधारित वातावरण में शैक्षणिक ईमानदारी बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

शिक्षकों को AI टूल्स का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

सम्मेलन में केवल नीतिगत चर्चा ही नहीं हुई, बल्कि शिक्षकों के लिए इंटरैक्टिव वर्कशॉप भी आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं में प्रतिभागियों ने AI आधारित टूल्स का व्यावहारिक उपयोग सीखा और यह समझा कि इन्हें कक्षा में किस तरह प्रभावी ढंग से अपनाया जा सकता है।

वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य यह था कि AI को शिक्षक का सहयोगी बनाया जाए, न कि उसका विकल्प। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक शिक्षा को बेहतर बना सकती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका को कभी नहीं बदल सकती।

इस दौरान विभिन्न देशों के शिक्षकों ने अपने अनुभव और सफल प्रयोग भी साझा किए, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग और सीखने का नया नेटवर्क विकसित हुआ।

स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे UNESCO के AI संसाधन

सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि UNESCO ने शिक्षा में AI के उपयोग से जुड़े अपने वैश्विक संसाधनों को पहली बार बोस्नियाई, क्रोएशियाई, सर्बियाई और मोंटेनेग्रिन भाषाओं में उपलब्ध कराया।

स्थानीय भाषाओं में इन संसाधनों के उपलब्ध होने से क्षेत्र के स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में इनके उपयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इन दस्तावेजों में शिक्षकों को AI का जिम्मेदारी से उपयोग करने और तकनीकी नवाचार को शिक्षा के उद्देश्यों के अनुरूप अपनाने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

भविष्य की शिक्षा के लिए मजबूत और समावेशी व्यवस्था पर जोर

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत, समावेशी और डिजिटल बदलावों के लिए तैयार बनाना जरूरी है। उनका कहना था कि AI को सफलतापूर्वक अपनाने के लिए केवल तकनीकी संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत नैतिक ढांचा और शिक्षकों का लगातार प्रशिक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि AI का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाना नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और बेहतर सीखने के अनुभव विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए।

शिक्षा के केंद्र में हमेशा रहेंगे शिक्षक

पूरे सम्मेलन के दौरान एक बात बार-बार सामने आई कि चाहे AI कितना भी उन्नत क्यों न हो जाए, शिक्षा में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। शिक्षक केवल जानकारी देने का काम नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों का विकास करते हैं, सही मार्गदर्शन देते हैं और उन्हें जटिल विषयों को समझने में मदद करते हैं।

सम्मेलन का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि शिक्षा का भविष्य केवल नई तकनीकों को अपनाने में नहीं, बल्कि उन्हें इस तरह विकसित और इस्तेमाल करने में है, जिससे मानव गरिमा, समावेशिता और सभी विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर बनेगा, लेकिन यह तभी सफल होगा जब तकनीक शिक्षा की सेवा करेगी, न कि शिक्षा तकनीक के अनुसार खुद को बदलने के लिए मजबूर होगी। इसी प्रक्रिया में शिक्षक हमेशा सबसे अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

Asmita Sarkar

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