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देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव: 2026-27 होगा PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स में दाखिले का आखिरी सत्र

देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव: 2026-27 होगा PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स में दाखिले का आखिरी सत्र

देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव: 2026-27 होगा PG डिप्लोमा मेडिकल कोर्स में दाखिले का आखिरी सत्र

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा (Postgraduate Medical Education) को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। आयोग ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 पोस्टग्रेजुएट (PG) डिप्लोमा मेडिकल कोर्स में नए प्रवेश का अंतिम वर्ष होगा। इसके बाद शैक्षणिक सत्र 2027-28 से इन डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में नए दाखिले पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।

यह निर्णय देशभर में चिकित्सा शिक्षा को अधिक मानकीकृत, गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञता आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

2027-28 से बंद होंगे PG डिप्लोमा कोर्स में नए दाखिले

22 जून को जारी सार्वजनिक सूचना में एनएमसी ने स्पष्ट किया कि सभी पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। इनकी जगह संबंधित विषयों के ब्रॉड स्पेशियलिटी डिग्री प्रोग्राम, यानी एमडी (Doctor of Medicine) और एमएस (Master of Surgery) को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसका मतलब है कि 2026-27 बैच के बाद किसी भी नए छात्र को पीजी डिप्लोमा मेडिकल कोर्स में प्रवेश नहीं मिलेगा। हालांकि, पहले से दाखिला ले चुके छात्रों की पढ़ाई और डिग्री पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मेडिकल कॉलेजों को शुरू करनी होगी सीट रूपांतरण प्रक्रिया

एनएमसी के पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (PGMEB) ने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे अपने पीजी डिप्लोमा कोर्स की सीटों को एमडी और एमएस सीटों में बदलने की प्रक्रिया शुरू करें।

इसके लिए संस्थानों को मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) के पास आवेदन करना होगा। आयोग ने बताया है कि इस प्रक्रिया के लिए जल्द ही एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां कॉलेज आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की अंतिम तिथि और विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

जिन कॉलेजों में संसाधन हैं, उन्हें मिलेगा फायदा

एनएमसी के अनुसार, देश के कई मेडिकल कॉलेजों में एक ही विषय में डिप्लोमा और डिग्री दोनों कार्यक्रम पहले से संचालित हो रहे हैं। वहीं कुछ संस्थान केवल डिप्लोमा कोर्स चला रहे हैं।

आयोग का मानना है कि ऐसे अधिकांश संस्थानों के पास आवश्यक फैकल्टी, अस्पताल, क्लिनिकल सुविधाएं और बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है। इसलिए वे निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद आसानी से एमडी और एमएस कार्यक्रम संचालित कर सकते हैं।

हालांकि, सीटों का रूपांतरण केवल उन्हीं संस्थानों को मंजूर किया जाएगा जो एनएमसी के सभी शैक्षणिक और बुनियादी मानकों का पालन करेंगे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

एनएमसी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य पूरे देश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा को एक समान और अधिक व्यवस्थित बनाना है। आयोग चाहता है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों का प्रशिक्षण आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के मानकों के अनुरूप हो और सभी छात्रों को समान गुणवत्ता वाली डिग्री आधारित शिक्षा मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि एमडी और एमएस जैसी डिग्री कोर्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक व्यापक मान्यता प्राप्त है। ऐसे में यह बदलाव भारतीय चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और भविष्य के विशेषज्ञ डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण देने में मदद करेगा।

राज्यों और विश्वविद्यालयों को जारी किए गए निर्देश

एनएमसी ने यह अधिसूचना सभी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों, राज्य चिकित्सा शिक्षा विभागों और संबंधित विश्वविद्यालयों को भेज दी है। आयोग ने सभी संस्थानों को समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने और सीट रूपांतरण के लिए तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

आने वाले महीनों में एमएआरबी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों को आवेदन करना होगा, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से पीजी डिप्लोमा सीटों को एमडी और एमएस सीटों में परिवर्तित किया जाएगा।

Asmita Sarkar

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