
बिहार के युवाओं को उच्च शिक्षा के साथ रोजगार के लिए तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। अब प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले ग्रेजुएशन के छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि इंटर्नशिप करने वाले छात्रों को हर महीने 12,300 रुपये का स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल (Practical Skills) से भी लैस करना है। इस योजना की जानकारी बिहार सरकार की ओर से साझा की गई है। इसे लेकर राज्य के कैबिनेट मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी विस्तार से जानकारी दी।
2026-27 सत्र से होगी योजना की शुरुआत
सरकार की योजना के अनुसार इस इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरुआत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से की जाएगी। पहले चरण में राज्य के 13 कॉलेजों को इस योजना में शामिल किया गया है। इन कॉलेजों में ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष (थर्ड ईयर) के छात्रों को इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा।
इंटर्नशिप पूरी करने वाले प्रत्येक छात्र को 12,300 रुपये प्रति माह का स्टाइपेंड दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि शुरुआती चरण के सफल क्रियान्वयन के बाद इस योजना का विस्तार राज्य के अन्य सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक किया जाएगा।
कॉलेज परिसर में ही मिलेगी इंटर्नशिप
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्रों को इंटर्नशिप के लिए अलग-अलग शहरों या कंपनियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार की योजना के तहत इंटर्नशिप देने वाली कंपनियां और संस्थान सीधे कॉलेज परिसर में आएंगे और वहीं छात्रों को प्रशिक्षण देंगे।
इससे छात्रों का समय बचेगा, पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और उन्हें कॉलेज के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे अधिक से अधिक छात्र इंटर्नशिप का लाभ उठा सकेंगे।
पढ़ाई के साथ स्किल डेवलपमेंट पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था के तहत ग्रेजुएशन पाठ्यक्रम को भी रोजगार आधारित बनाने की कोशिश की गई है। इसके लिए पाठ्यक्रम में 75 प्रतिशत हिस्सा अकादमिक पढ़ाई (थ्योरी) और 25 प्रतिशत हिस्सा स्किल ट्रेनिंग एवं प्रैक्टिकल लर्निंग के लिए निर्धारित किया गया है।
इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों को केवल परीक्षा पास कराने तक सीमित न रखकर उन्हें वास्तविक कार्यस्थल के लिए तैयार करना है। इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाला अनुभव उन्हें उद्योगों की कार्यप्रणाली समझने और पेशेवर कौशल विकसित करने में मदद करेगा।
नौकरी मिलने में भी होगी आसानी
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं जिनके पास पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव भी हो। ऐसे में इस योजना के तहत इंटर्नशिप पूरी करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र मिलेगा, जिसे वे नौकरी के लिए आवेदन करते समय अपने अनुभव के रूप में प्रस्तुत कर सकेंगे।
इससे छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और कैंपस प्लेसमेंट या अन्य नौकरियों में उन्हें बेहतर अवसर मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।
राज्य में रोजगारोन्मुख शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
बिहार सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उस सोच के अनुरूप मानी जा रही है, जिसमें उच्च शिक्षा को कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। यदि यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में राज्य के हजारों छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों से जुड़ने और आर्थिक सहायता प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।




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