
गुजरात सरकार ने राज्य में स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने और हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 23 जून से तीन दिवसीय ‘शाला प्रवेशोत्सव’ और ‘कन्या केलवणी’ अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान 25 जून तक चलेगा और इसके तहत राज्यभर के करीब 28.58 लाख बच्चों का विभिन्न कक्षाओं में नामांकन कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इस वर्ष अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मेहसाणा जिले के वडनगर स्थित बी.एन. हाई स्कूल से की। यह वही विद्यालय है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी। इसी कारण इस बार अभियान की शुरुआत के लिए इस स्कूल का विशेष रूप से चयन किया गया।
24वें वर्ष में पहुंचा शिक्षा अभियान
‘शाला प्रवेशोत्सव’ और ‘कन्या केलवणी’ अभियान की शुरुआत वर्ष 2003 में तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका उद्देश्य स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और राज्य में नामांकन दर बढ़ाना था। पिछले दो दशकों में यह अभियान गुजरात की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और इस वर्ष इसका 24वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है।
38,400 स्कूलों में चलेगा नामांकन अभियान
राज्य सरकार के अनुसार, तीन दिनों तक चलने वाला यह अभियान गुजरात के लगभग 38,400 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारी भी अलग-अलग जिलों में स्कूलों का दौरा करेंगे और नामांकन कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल वडनगर में एक आंगनवाड़ी केंद्र सहित विभिन्न कक्षाओं में नए विद्यार्थियों का स्वागत करेंगे और अभिभावकों से भी संवाद करेंगे।
किन बच्चों का होगा नामांकन
अभियान के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों को उनकी उपयुक्त कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा। 5 से 6 वर्ष आयु के बच्चों का प्रवेश बालवाटिका में कराया जाएगा, जबकि 6 से 7 वर्ष आयु के बच्चों का दाखिला कक्षा 1 में होगा।
इसके अलावा, जिन विद्यार्थियों ने कक्षा 8 पूरी कर ली है, उन्हें कक्षा 9 और कक्षा 10 उत्तीर्ण करने वाले छात्रों को कक्षा 11 में प्रवेश दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई बीच में न रुके और ड्रॉपआउट की संभावना कम हो।
अधिकारी करेंगे स्कूलों का दौरा
राज्य सरकार ने बताया कि अभियान में करीब 465 वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति भाग ले रहे हैं। ये अधिकारी विभिन्न स्कूलों का दौरा कर बच्चों के नामांकन को प्रोत्साहित करेंगे। साथ ही वे स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के साथ बैठक कर स्कूलों के शैक्षणिक प्रदर्शन, आधारभूत सुविधाओं, छात्र उपस्थिति और अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा करेंगे।
समुदाय की भागीदारी पर रहेगा जोर
सरकार का कहना है कि इस अभियान को सफल बनाने में स्कूल प्रबंधन समितियों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसका उद्देश्य केवल नए विद्यार्थियों का दाखिला कराना नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से स्कूल पहुंचे और उसकी शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के जनभागीदारी आधारित अभियान से शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी और सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।




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