
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से एक संसदीय स्थायी समिति के साथ साझा किए गए ताजा विश्लेषणात्मक आंकड़ों ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसे प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचने वाले अभ्यर्थियों में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अब भी सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। हालांकि, इनकी सफलता के पीछे एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है—अधिकांश इंजीनियर उम्मीदवार वैकल्पिक (Optional) विषय के रूप में ह्यूमैनिटीज (मानविकी) विषयों को चुन रहे हैं।
यह डेटा UPSC ने हाल ही में कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति के साथ साझा किया है। इसमें वर्ष 2019 से 2025 तक के रुझानों का विश्लेषण किया गया है, जो बताता है कि सिविल सेवा परीक्षा में विषय चयन का पैटर्न लगातार बदल रहा है।
सात वर्षों में बढ़ी ह्यूमैनिटीज पृष्ठभूमि वाले सफल अभ्यर्थियों की संख्या
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात वर्षों में ह्यूमैनिटीज विषयों से स्नातक करने वाले अभ्यर्थियों की सफलता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साल 2019 में UPSC CSE के इंटरव्यू तक पहुंचने वाले उम्मीदवारों में ह्यूमैनिटीज ग्रेजुएट्स की हिस्सेदारी 20.59 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 34.41 प्रतिशत हो गई। इसी तरह अंतिम मेरिट सूची में ह्यूमैनिटीज पृष्ठभूमि के सफल उम्मीदवारों का प्रतिशत 24.19 से बढ़कर 35.28 प्रतिशत पहुंच गया।
दूसरी ओर, विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गई। 2019 में इंटरव्यू के लिए बुलाए गए उम्मीदवारों में इनकी हिस्सेदारी 79.41 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 65.59 प्रतिशत रह गई। अंतिम चयनित उम्मीदवारों में भी इनकी हिस्सेदारी 75.81 प्रतिशत से घटकर 64.72 प्रतिशत हो गई।
2025 में सफल उम्मीदवारों में 47% इंजीनियर, लेकिन 84% ने चुना ह्यूमैनिटीज वैकल्पिक विषय
आंकड़ों के मुताबिक, UPSC CSE 2025 में सफल उम्मीदवारों में लगभग 47 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट थे। हालांकि, इनमें से अधिकांश ने अपनी इंजीनियरिंग शाखा के बजाय मानविकी विषयों को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।
रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में सफल उम्मीदवारों में 84 प्रतिशत ने ह्यूमैनिटीज विषयों को ऑप्शनल के रूप में चुना। वहीं केवल 2 प्रतिशत उम्मीदवारों ने इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों को ऑप्शनल रखा। इसके अलावा 11 प्रतिशत ने विज्ञान और 3 प्रतिशत ने मेडिकल विषयों का चयन किया।
यह रुझान इस बात का संकेत देता है कि सिविल सेवा परीक्षा में वैकल्पिक विषय चुनते समय उम्मीदवार अपनी स्नातक डिग्री के बजाय स्कोरिंग क्षमता, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता और परीक्षा की प्रकृति को अधिक महत्व दे रहे हैं।
टॉप-50 रैंकर्स में भी दिखा यही रुझान
UPSC CSE 2025 के टॉप-50 सफल उम्मीदवारों के विश्लेषण में भी यही पैटर्न देखने को मिला। शीर्ष 50 में शामिल 16 उम्मीदवार इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से थे, लेकिन इनमें से 15 ने ह्यूमैनिटीज विषयों को अपना वैकल्पिक विषय बनाया। केवल एक उम्मीदवार ने इंजीनियरिंग विषय को ही ऑप्शनल के रूप में चुना।
एक दशक से लगातार बना हुआ है यह ट्रेंड
संसदीय समिति को सौंपे गए विश्लेषण में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह कोई नया रुझान नहीं है। पिछले करीब एक दशक से यही पैटर्न देखने को मिल रहा है।
उदाहरण के तौर पर, UPSC CSE 2016 के टॉप-50 सफल उम्मीदवारों में 36 इंजीनियरिंग ग्रेजुएट थे, लेकिन इनमें से केवल पांच ने इंजीनियरिंग को ही वैकल्पिक विषय के रूप में चुना था। अधिकांश उम्मीदवारों ने उस समय भी ह्यूमैनिटीज विषयों को प्राथमिकता दी थी।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
UPSC के ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा में सफलता केवल किसी विशेष शैक्षणिक पृष्ठभूमि पर निर्भर नहीं करती। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के उम्मीदवार आज भी बड़ी संख्या में सफल हो रहे हैं, लेकिन वैकल्पिक विषय के चयन में वे मानविकी विषयों को अधिक उपयुक्त मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि UPSC CSE में वैकल्पिक विषय का चयन उम्मीदवार की रुचि, विषय की समझ, उत्तर लेखन क्षमता और तैयारी की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। यही कारण है कि वर्षों से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स भी ह्यूमैनिटीज विषयों की ओर रुख करते रहे हैं।
UPSC द्वारा साझा किया गया यह विश्लेषण उन अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने जा रहे हैं। यह बताता है कि सही रणनीति और उपयुक्त विषय चयन, शैक्षणिक पृष्ठभूमि से कहीं अधिक अहम भूमिका निभा सकता है।




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