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Scientists at NIT Rourkela have developed a smart wound dressing that reduces pain and accelerates wound healing

NIT राउरकेला के वैज्ञानिकों ने विकसित की स्मार्ट वाउंड ड्रेसिंग, दर्द होगा कम और घाव तेजी से भरेगा

Scientists at NIT Rourkela have developed a smart wound dressing that reduces pain and accelerates wound healing

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी स्मार्ट वाउंड ड्रेसिंग (Smart Wound Dressing) विकसित की है, जो ड्रेसिंग बदलते समय होने वाले दर्द को कम करने, संक्रमण के खतरे को घटाने और घाव को तेजी से भरने में मदद कर सकती है।

इस तकनीक को एनआईटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर प्रो. प्रसून कुमार और उनकी शोध टीम ने विकसित किया है। यह नई ड्रेसिंग घावों के उपचार से जुड़ी एक आम समस्या का समाधान करने का प्रयास करती है। पारंपरिक कॉटन गॉज (Cotton Gauze) अक्सर घाव की सतह से चिपक जाता है, जिससे ड्रेसिंग हटाते समय नए बने ऊतकों (टिश्यू) को नुकसान पहुंच सकता है और मरीज को अधिक दर्द होता है।

कॉटन गॉज का उपयोग लंबे समय से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह किफायती, अच्छी तरह तरल पदार्थ सोखने वाला और इस्तेमाल में आसान होता है। हालांकि, यह संक्रमण को सक्रिय रूप से रोकने या बार-बार ड्रेसिंग बदलने के दौरान होने वाली तकलीफ को कम करने में सक्षम नहीं होता। शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे मरीज का दर्द बढ़ सकता है और कुछ मामलों में घाव भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने काइटोसान (Chitosan) की परत चढ़े कॉटन गॉज और इलेक्ट्रोस्पन नैनोफाइबर (Electrospun Nanofibrous Layer) को मिलाकर एक स्मार्ट ड्रेसिंग तैयार की है। इस नैनोफाइबर परत में करक्यूमिन (Curcumin) का उपयोग किया गया है, जो हल्दी से प्राप्त एक प्राकृतिक तत्व है और अपने जीवाणुरोधी (Antimicrobial) गुणों के लिए जाना जाता है। यह परत घाव और कॉटन गॉज के बीच लगाई जाती है, जिससे गॉज सीधे घाव से चिपकने की संभावना काफी कम हो जाती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, करक्यूमिन युक्त नैनोफाइबर धीरे-धीरे इस प्राकृतिक तत्व को घाव तक पहुंचाते हैं। इससे लंबे समय तक दवा का प्रभाव बना रहता है, संक्रमण का खतरा कम होता है और घाव का वातावरण साफ एवं उपचार के अनुकूल बना रहता है।

प्रो. प्रसून कुमार ने बताया कि प्रयोगशाला परीक्षणों में यह स्मार्ट ड्रेसिंग सामान्य कॉटन गॉज की तुलना में घाव से कम चिपकी। उन्होंने कहा कि नैनोफाइबर परत नई कोशिकाओं के विकास और ऊतकों के पुनर्निर्माण (Tissue Regeneration) में मदद करती है, जबकि करक्यूमिन का लगातार नियंत्रित उत्सर्जन जीवाणुरोधी सुरक्षा प्रदान करता है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि इस स्मार्ट ड्रेसिंग का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन किया जाता है, तो इसकी कीमत लगभग 50 से 60 रुपये हो सकती है। तुलना के लिए, समान आकार के सामान्य कॉटन गॉज बैंडेज रोल की कीमत करीब 30 रुपये होती है।

इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Emergent Materials में प्रकाशित हुए हैं। अब शोध टीम इस तकनीक का पेटेंट दाखिल करने और क्लीनिकल ट्रायल के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशने की तैयारी कर रही है।

 

 

Asmita Sarkar

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