
जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराई गई एक पुस्तक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि समग्र शिक्षा के तहत छात्रों तक पहुंचाई गई एक किताब में प्रतिबंधित संगठन JKLF के संस्थापक मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ और कुछ अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
विवाद बढ़ने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट करने तथा उनकी पुस्तकों को केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी स्कूलों और पुस्तकालयों से हटाने का निर्णय लिया गया है।
सबसे पहले जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने उठाया मामला
इस मुद्दे को सबसे पहले जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (JKPF) ने सार्वजनिक किया। संगठन का आरोप है कि पुस्तक में इतिहास को तथ्यों के विपरीत प्रस्तुत किया गया है और ऐसी सामग्री छात्रों के बीच नहीं पढ़ाई जानी चाहिए।
फोरम ने विवादित सामग्री को तत्काल पाठ्यक्रम और पुस्तकालयों से हटाने के साथ-साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी पुस्तक को सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम या पुस्तकालयों में शामिल करने से पहले एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। ऐसे में यदि विवादित सामग्री वाली पुस्तक छात्रों तक पहुंची है, तो इसे केवल प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ऐसी पुस्तक को मंजूरी देकर स्कूलों तक पहुंचाया गया है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस विवाद के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली पुस्तकों की सामग्री तथ्यात्मक, निष्पक्ष और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि स्कूलों में उपयोग होने वाली किसी भी शैक्षणिक सामग्री की समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए, ताकि छात्रों तक प्रमाणिक और संतुलित जानकारी पहुंचे।
सरकार ने की सख्त कार्रवाई
विवाद सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जो कथित रूप से इन पुस्तकों की स्वीकृति और खरीद प्रक्रिया से जुड़े थे।
सरकार ने संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट करने का भी फैसला लिया है। साथ ही उनके सभी प्रकाशनों को केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी स्कूलों और पुस्तकालयों से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की जांच पर रहेगी नजर
फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विभिन्न पक्षों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित सामग्री वाली पुस्तक स्कूलों तक कैसे पहुंची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में अन्य प्रशासनिक कदम भी उठाए जा सकते हैं।




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