
दिल्ली सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए ‘मिशन कायाकल्प’ अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों को केवल पढ़ाई का केंद्र बनाना नहीं, बल्कि उन्हें छात्रों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, आधुनिक और प्रेरक शिक्षण परिसर के रूप में विकसित करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस अभियान के तहत राजधानी के अलग-अलग जिलों में चयनित सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार कार्य किए जा रहे हैं। इनमें स्कूल भवनों की मरम्मत, प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों का नवीनीकरण, हरियाली बढ़ाने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुविधाएं विकसित करने जैसे काम शामिल हैं।
सरकार और समाज मिलकर बदलेंगे स्कूलों की तस्वीर
मुख्यमंत्री के अनुसार, मिशन कायाकल्प को केवल सरकारी संसाधनों तक सीमित नहीं रखा गया है। इस अभियान में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत सहयोग देने वाली संस्थाएं, सामाजिक संगठन, मार्केट एसोसिएशन और स्थानीय समुदाय भी भागीदारी कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि जनभागीदारी के इस मॉडल से सरकारी स्कूलों में तेजी से सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में समाज की भूमिका भी बढ़ रही है।
उत्तर दिल्ली में सेंसरी पार्क और आधुनिक प्रयोगशाला
उत्तर दिल्ली में छह सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने के बाद दो स्कूलों को मिशन कायाकल्प के तहत चुना गया। करीब 16.20 लाख रुपये की लागत से शंकराचार्य मार्ग स्थित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के स्कूल में सेंसरी पार्क का नवीनीकरण, नए आरओ प्लांट और वॉटर कूलर लगाए गए हैं।
वहीं, रूप नगर स्थित सरकारी स्कूल की फिजिक्स लैब को आधुनिक बनाया गया है ताकि छात्रों को प्रयोग आधारित शिक्षा का बेहतर अनुभव मिल सके।
दक्षिण दिल्ली के स्कूलों में बड़े स्तर पर विकास कार्य
दक्षिण दिल्ली के रामानुजन सर्वोदय कन्या विद्यालय, महरौली में लगभग 48.73 लाख रुपये और सर्वोदय को-एड सीनियर सेकेंडरी विद्यालय, कुतुब महरौली में करीब 98.58 लाख रुपये की लागत से कई सुधार कार्य किए गए हैं।
इन स्कूलों में शौचालयों का नवीनीकरण, सैनिटरी फिटिंग बदलना, दीवारों और छतों की मरम्मत, मौसमरोधी पेंट से रंगाई, परिसर की सफाई और सौंदर्यीकरण किया गया है। इसके अलावा नए वॉटर कूलर लगाए गए हैं और परिसर में पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाई गई है।
पश्चिम दिल्ली में पेयजल और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर जोर
पश्चिम दिल्ली के मोहन गार्डन और जनकपुरी स्थित सरकारी स्कूलों में भी व्यापक विकास कार्य चल रहे हैं।
मोहन गार्डन स्कूल में लगभग 77.71 लाख रुपये की लागत से छत की मरम्मत, वॉटरप्रूफिंग, पेयजल क्षेत्र का नवीनीकरण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, सीवर लाइन और स्टाफ शौचालयों का सुधार किया जा रहा है।
वहीं जनकपुरी के स्कूल में करीब 38.77 लाख रुपये की लागत से एमपी हॉल की वॉटरप्रूफिंग, नए आरओ प्लांट, वॉटर कूलर, शौचालयों का नवीनीकरण और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है।
उत्तर-पूर्व दिल्ली में स्वच्छता और लाइब्रेरी पर विशेष ध्यान
उत्तर-पूर्व दिल्ली के गोकलपुर और शाहदरा स्थित सरकारी स्कूलों में भी मिशन कायाकल्प के तहत सुधार कार्य पूरे किए गए हैं।
यहां शौचालयों की गहरी सफाई, नई सैनिटरी फिटिंग, भवनों की मरम्मत और रंगाई-पुताई के साथ नए वॉटर कूलर लगाए गए हैं। शाहदरा स्थित स्कूल की लाइब्रेरी में नई कुर्सियां उपलब्ध कराई गई हैं और छात्रों को प्रेरित करने के लिए मणि बेन पटेल तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र भी लगाए गए हैं।
आउटर नॉर्थ के स्कूल में बनी स्पेस लैब
आउटर नॉर्थ जिले के सावदा घेवरा कम्युनिटी बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में लगभग 8 लाख रुपये की लागत से भवनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
इस स्कूल में एक स्पेस लैब भी स्थापित की गई है, जिससे छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जुड़ी जानकारी व्यावहारिक रूप से मिल सके। साथ ही परिसर में ढका हुआ शेड बनाया गया है और अन्य आवश्यक सुविधाओं को भी बेहतर किया गया है।
केवल रंगाई-पुताई नहीं, स्कूलों का समग्र विकास
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मिशन कायाकल्प सिर्फ भवनों की रंगाई-पुताई तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों का समग्र विकास करना है, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
अभियान के तहत विज्ञान प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, आरओ प्लांट, वॉटर कूलर, सुरक्षित और साफ शौचालय, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सुविधाएं, हरित परिसर और बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों की बदल रही है तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन कायाकल्प के शुरुआती परिणाम कई स्कूलों में दिखाई देने लगे हैं। जिन स्कूलों में पहले जर्जर भवन, पुराने शौचालय और सीमित सुविधाएं थीं, वहां अब साफ-सुथरा परिसर, बेहतर पेयजल व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार आगे भी सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में इसी प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी। सरकार का लक्ष्य राजधानी के प्रत्येक सरकारी स्कूल को ऐसा शिक्षण परिसर बनाना है, जो आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण का उदाहरण पेश करे।




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