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Global Teacher Prize 2026: भारत की रूबल नागी ने जीता 1 मिलियन डॉलर का सम्मान, झुग्गियों की दीवारों को बनाया बच्चों का क्लासरूम

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भारत की शिक्षिका, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी ने शिक्षा के क्षेत्र में देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। दुबई में आयोजित वर्ल्ड गवर्नमेंट्स समिट 2026 के दौरान उन्हें 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.5 करोड़ रुपये) का प्रतिष्ठित Global Teacher Prize 2026 प्रदान किया गया। यह पुरस्कार Varkey Foundation की पहल है, जिसे UNESCO के सहयोग और GEMS Education के साथ आयोजित किया जाता है। शिक्षा जगत में इसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है।

रूबल नागी का चयन 139 देशों से प्राप्त 5,000 से अधिक नामांकन और आवेदनों में से किया गया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा को वंचित समुदायों तक पहुंचाने और कला के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करने के अभिनव प्रयासों के लिए मिला।

कौन हैं रूबल नागी?

जम्मू-कश्मीर में जन्मी रूबल नागी ने लंदन के प्रतिष्ठित Slade School of Fine Art से कला की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा को केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज के सबसे वंचित बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का माध्यम बनाया।

पुरस्कार मिलने के बाद रूबल नागी ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि भारत, देश के हर शिक्षक, हर बच्चे और उनकी पूरी टीम का है, जिसने शिक्षा की ताकत पर विश्वास किया।

झुग्गियों की दीवारों को बना दिया खुले क्लासरूम

रूबल नागी ने Rouble Nagi Art Foundation की स्थापना की, जिसके माध्यम से पिछले दो दशकों में देशभर के 100 से अधिक वंचित समुदायों और गांवों में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।

उनकी सबसे चर्चित पहल ‘Living Walls of Learning’ है। इस अभियान के तहत झुग्गी-झोपड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों की खाली दीवारों पर ऐसे शैक्षिक चित्र (म्यूरल) बनाए गए, जिनकी मदद से बच्चे पढ़ना-लिखना, गणित, विज्ञान, स्वच्छता और पर्यावरण जैसे विषय खेल-खेल में सीखते हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पहल के जरिए 10 लाख से अधिक बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने में मदद मिली है और कई इलाकों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

आसान नहीं था यह सफर

रूबल नागी के लिए शुरुआत आसान नहीं थी। उन्होंने ऐसे परिवारों के बीच काम शुरू किया, जहां शिक्षा प्राथमिकता नहीं थी और रोजी-रोटी सबसे बड़ी चुनौती थी।

उन्होंने लगातार समुदायों के बीच जाकर अभिभावकों को समझाया कि शिक्षा बच्चों का भविष्य बदल सकती है। उनका मानना है कि केवल जागरूकता फैलाने से बदलाव नहीं आता, बल्कि जमीनी स्तर पर लगातार काम करना जरूरी होता है। इसी भरोसे ने हजारों परिवारों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रपति भवन तक पहुंची उनकी कला

रूबल नागी की कला को राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष पहचान मिली। वर्ष 2017 में वह पहली ऐसी कलाकार बनीं, जिन्हें राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया गया। उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके कार्यों की सराहना की थी, जिससे उनके सामाजिक अभियानों को नई पहचान मिली।

उन्होंने अपने अनुभवों को ‘The Slum Queen’ (2022) नामक पुस्तक में भी साझा किया है।

पुरस्कार राशि का उपयोग कहां होगा?

रूबल नागी ने घोषणा की है कि वह 1 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि का उपयोग वंचित युवाओं और महिलाओं के लिए निःशुल्क व्यावसायिक (Vocational) और डिजिटल स्किल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने में करेंगी।

उनकी योजना महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न क्षेत्रों में कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सेंटर शुरू करने की है, ताकि युवाओं को रोजगार से जुड़ी आधुनिक कौशल प्रशिक्षण मिल सके।

शिक्षकों के लिए दिया प्रेरक संदेश

रूबल नागी का मानना है कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन बच्चों तक पहुंचना है, जो कक्षा में पीछे रह जाते हैं या पढ़ाई में कमजोर माने जाते हैं।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे केवल अच्छे अंक लाने वाले छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उन बच्चों पर भी विशेष ध्यान दें जिन्हें सबसे अधिक प्रोत्साहन की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि बचपन में हिंदी माध्यम से अंग्रेजी माध्यम में आने के दौरान उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, लेकिन एक शिक्षक के विश्वास और मार्गदर्शन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।

शिक्षा और समाज सेवा का प्रेरक उदाहरण

रूबल नागी की कहानी बताती है कि शिक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती। यदि नवाचार, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी साथ हो, तो एक दीवार भी क्लासरूम बन सकती है और लाखों बच्चों का भविष्य बदल सकती है। Global Teacher Prize 2026 जीतकर उन्होंने न केवल भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाया है, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया है कि शिक्षा में छोटे-छोटे नवाचार बड़े बदलाव ला सकते हैं।

 

 

Asmita Sarkar

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