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CBSE Board Exam 2026: Supreme Court seeks response from CBSE and the Centre on a petition filed by students from Gulf countries

CBSE Board Exam 2026: खाड़ी देशों के छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने CBSE और केंद्र से मांगा जवाब

CBSE Board Exam 2026: Supreme Court seeks response from CBSE and the Centre on a petition filed by students from Gulf countries

CBSE Board Exam 2026: खाड़ी और पश्चिम एशिया के देशों में पढ़ने वाले CBSE कक्षा 12 के छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नोटिस जारी किया है। छात्रों ने दावा किया है कि क्षेत्रीय संघर्ष और अस्थिर परिस्थितियों के कारण उनकी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा की तैयारी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। इसी आधार पर उन्होंने 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष राहत देने की मांग की है।

न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और CBSE से जवाब तलब किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई से पहले याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है।

छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया?

यह याचिका अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और पश्चिम एशिया के कई देशों में हाल के क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा संबंधी हालात ने हजारों भारतीय छात्रों की शिक्षा को प्रभावित किया।

याचिका के अनुसार, कई छात्रों की नियमित पढ़ाई बाधित हुई, परीक्षा की तैयारी प्रभावित हुई और उन्हें मानसिक तनाव व अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में छात्रों को अस्थायी विस्थापन जैसी परिस्थितियों से भी गुजरना पड़ा, जिसका सीधा असर उनकी बोर्ड परीक्षा के प्रदर्शन पर पड़ा।

छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी?

याचिका में प्रभावित छात्रों के लिए कई विशेष उपायों की मांग की गई है। इनमें एकमुश्त ग्रेस मार्क्स या अतिरिक्त अंक देने, विशेष पुनर्परीक्षा आयोजित करने और विशेष इम्प्रूवमेंट परीक्षा कराने की मांग शामिल है।

छात्रों ने यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें सुधार परीक्षा में किसी भी संख्या में विषय चुनने की अनुमति दी जाए और यदि वे दो बार परीक्षा देते हैं, तो दोनों में से बेहतर परिणाम को अंतिम परिणाम माना जाए। उनका कहना है कि किसी भी छात्र का शैक्षणिक वर्ष इन परिस्थितियों के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए।

मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

याचिका में 27 मार्च को जारी CBSE की मूल्यांकन नीति पर भी आपत्ति जताई गई है। छात्रों का कहना है कि मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली उन अभ्यर्थियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में नहीं रखती, जो संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे थे।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यदि विशेष परिस्थितियों को नजरअंदाज कर सामान्य मूल्यांकन किया गया, तो इससे छात्रों के अंक, उच्च शिक्षा में प्रवेश और भविष्य के करियर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसर सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था लागू करने का अनुरोध किया है।

DASA और CIWG प्रवेश नियमों में भी मांगी छूट

याचिका में विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों के लिए लागू प्रवेश योजनाओं में भी राहत देने की मांग की गई है।

छात्रों ने Direct Admission of Students Abroad (DASA) योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अंकों की पात्रता को घटाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की है। इसके अलावा Children of Indian Workers in Gulf (CIWG) श्रेणी के तहत आवेदन करने वाले छात्रों के लिए भी विशेष छूट देने का अनुरोध किया गया है।

अलग काउंसलिंग और प्रोविजनल एडमिशन की मांग

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए जाएं कि वे प्रभावित छात्रों के आवेदन केवल कम अंकों के आधार पर अस्वीकार न करें।

जहां आवश्यकता हो, वहां छात्रों को प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए और यदि विशेष परीक्षा या संशोधित परिणाम जारी होते हैं, तो उनके लिए अलग काउंसलिंग विंडो उपलब्ध कराई जाए। इससे किसी भी छात्र का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा।

पहले भी भेजे गए थे ज्ञापन

याचिका में कहा गया है कि प्रभावित छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न सामुदायिक संगठनों ने पहले भी CBSE और शिक्षा मंत्रालय को कई ज्ञापन भेजकर राहत की मांग की थी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई व्यापक नीति या विशेष व्यवस्था लागू नहीं की गई।

छात्रों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात और लंबे समय तक बनी अनिश्चितता उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियां थीं। ऐसे में उन्हें सामान्य परिस्थितियों में परीक्षा देने वाले छात्रों के समान मानकों पर आंकना न्यायसंगत नहीं होगा।

अब इस मामले में केंद्र सरकार और CBSE के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई में यह तय करेगा कि प्रभावित छात्रों को किसी प्रकार की विशेष राहत दी जाए या नहीं। फिलहाल अदालत ने मामले पर विचार करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और अंतिम फैसला आना बाकी है।

 

 

Asmita Sarkar

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