
NEET UG 2026 परीक्षा संपन्न होने के बाद अब देशभर के लाखों छात्र-छात्राओं की नजर रिजल्ट और कटऑफ पर टिकी है। मेडिकल कॉलेज में दाखिला पाने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी MBBS कॉलेज में सीट सुनिश्चित करने के लिए कितने अंक लाना सुरक्षित माना जा सकता है। हालांकि अंतिम कटऑफ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा रिजल्ट जारी होने और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) तथा राज्यों की काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन पिछले वर्षों के ट्रेंड और संभावित प्रतिस्पर्धा के आधार पर शुरुआती अनुमान लगाए जा रहे हैं।
सरकारी MBBS कॉलेज के लिए कितना स्कोर माना जा रहा है सुरक्षित?
NEET UG 2026 में भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा रहने की संभावना है। पिछले वर्षों के कटऑफ और काउंसलिंग ट्रेंड को देखते हुए सामान्य (General) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 610 या उससे अधिक अंक अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जा रहे हैं।
इसी तरह EWS वर्ग के लिए 600 से अधिक, OBC वर्ग के लिए 590 से अधिक, SC वर्ग के लिए 520 से अधिक और ST वर्ग के लिए 490 से अधिक अंक अच्छे माने जा सकते हैं। हालांकि यह केवल संभावित अनुमान हैं। वास्तविक कटऑफ परीक्षा के कठिनाई स्तर, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और काउंसलिंग के बाद ही तय होगी।
ज्यादा अंक आने पर बढ़ जाएगी टॉप मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना
अगर किसी उम्मीदवार के 680 या उससे अधिक अंक आते हैं तो उसे AIIMS सहित देश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलने की मजबूत संभावना बन सकती है।
650 से 679 अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों के पास भी देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट मिलने के अच्छे अवसर रहेंगे। वहीं 620 से 649 अंक वाले छात्र 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और राज्य कोटा, दोनों के माध्यम से अच्छी संभावना रख सकते हैं।
इसके अलावा 600 से 619 अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को भी कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलने की उम्मीद रहेगी। वहीं 550 से 599 अंक के बीच स्कोर करने वाले छात्रों के लिए प्रवेश की संभावना उनके राज्य, आरक्षण श्रेणी, कॉलेज की उपलब्ध सीटों और काउंसलिंग के विकल्पों पर निर्भर करेगी।
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) में कितनी रह सकती है कटऑफ?
15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के तहत पूरे देश के उम्मीदवार एक ही मेरिट सूची में प्रतिस्पर्धा करते हैं। यही वजह है कि इस श्रेणी की कटऑफ आमतौर पर राज्य कोटा की तुलना में अधिक रहती है।
विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार AIQ के तहत सामान्य वर्ग की कटऑफ 615 से 630 या उससे अधिक, EWS के लिए 610 से 625, OBC के लिए 590 से 610, SC के लिए 520 से 550 और ST वर्ग के लिए 500 से 540 अंक के बीच रह सकती है। अंतिम आंकड़े काउंसलिंग के दौरान सीटों की उपलब्धता और उम्मीदवारों की पसंद पर भी निर्भर करेंगे।
किन वजहों से बदल सकती है अंतिम कटऑफ?
NEET UG 2026 की अंतिम कटऑफ कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। यदि इस वर्ष प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान रहा और बड़ी संख्या में छात्रों ने उच्च अंक प्राप्त किए, तो कटऑफ बढ़ सकती है। वहीं यदि परीक्षा कठिन रही तो कटऑफ में कुछ कमी देखने को मिल सकती है।
इसके अलावा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की कुल संख्या, MBBS सीटों की उपलब्धता, आरक्षण नीति, ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा की काउंसलिंग का ट्रेंड तथा उम्मीदवारों की कॉलेज प्राथमिकता भी अंतिम कटऑफ तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रिजल्ट के बाद उम्मीदवार क्या करें?
रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवारों को सबसे पहले अपनी ऑल इंडिया रैंक (AIR), कैटेगरी रैंक और स्कोर का विश्लेषण करना चाहिए। इसके आधार पर ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा की काउंसलिंग के लिए समय रहते तैयारी शुरू करें।
साथ ही अपने पसंदीदा मेडिकल कॉलेजों की सूची पहले से तैयार रखें और सभी जरूरी दस्तावेज जैसे NEET स्कोरकार्ड, एडमिट कार्ड, 10वीं-12वीं की मार्कशीट, पहचान पत्र, श्रेणी प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र व्यवस्थित रखें। इससे काउंसलिंग के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
ध्यान दें: यहां बताए गए सभी स्कोर और कटऑफ केवल पिछले वर्षों के रुझानों और विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित हैं। NEET UG 2026 की वास्तविक कटऑफ NTA के परिणाम और MCC व संबंधित राज्यों की काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।




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