
जीएनए यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, डिजाइन एंड ऑटोमेशन – डिजाइन ने हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के डलहौजी में डिप्लोमा इन सिविल टेक्नोलॉजी के पांचवें सेमेस्टर के छात्रों के लिए सफलतापूर्वक सर्वे कैंप 2026 का आयोजन किया। पांच दिनों तक चले इस फील्ड कार्यक्रम में छात्रों को सर्वेक्षण तकनीकों और टोपोग्राफिकल मैपिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इस कैंप का उद्देश्य छात्रों को कक्षा में सीखे गए सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक इंजीनियरिंग परिस्थितियों में लागू करने का अनुभव देना और उनकी तकनीकी व फील्ड सर्वेक्षण से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत बनाना था।
आधुनिक सर्वे तकनीकों का मिला व्यावहारिक अनुभव
कैंप के दौरान छात्रों ने पेशेवर सर्वे उपकरणों की मदद से कई फील्ड आधारित सर्वेक्षण गतिविधियों में हिस्सा लिया।
पहले दिन छात्रों ने ऑटो लेवल (Auto Level) का उपयोग कर लेवलिंग, बेंचमार्क स्थापित करने और रिड्यूस्ड लेवल (Reduced Level-RL) की गणना करना सीखा।
दूसरे दिन प्लेन टेबल सर्वे (Plane Table Survey) कराया गया, जिसमें छात्रों ने सर्वे क्षेत्र का निर्धारित स्केल पर नक्शा तैयार किया और मौके पर ही अवलोकन कर मैपिंग का अभ्यास किया।
थियोडोलाइट सर्वे और टोपोग्राफिकल मैपिंग पर विशेष प्रशिक्षण
तीसरे दिन छात्रों ने थियोडोलाइट (Theodolite) की मदद से ट्रैवर्स सर्वे (Traverse Survey) किया। इस दौरान उन्होंने बेयरिंग और कोणों का मापन कर सटीक फील्ड ऑब्जर्वेशन दर्ज करना सीखा।
चौथे दिन प्रशिक्षण खज्जियार और कालाटोप के प्राकृतिक भू-भाग में आयोजित किया गया। यहां छात्रों ने विभिन्न कंटूर और प्राकृतिक स्थलाकृति का अध्ययन किया, जिससे उन्हें टोपोग्राफिकल सर्वेक्षण के महत्व और उसके व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला।
पांचवें और अंतिम दिन छात्रों ने पूरे कैंप के दौरान जुटाए गए फील्ड डेटा के आधार पर डलहौजी क्षेत्र का टोपोग्राफिकल मैप तैयार किया, जिसमें कंटूर लाइनों और ऊंचाई (Elevation) से जुड़ी जानकारी शामिल थी।
अनुभव आधारित सीखने पर दिया गया जोर
जीएनए यूनिवर्सिटी के अनुसार, इस सर्वे कैंप ने छात्रों के तकनीकी ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ उनकी टीमवर्क, समस्या समाधान और फील्ड में काम करने की क्षमता को भी बेहतर बनाया। साथ ही उन्हें सिविल इंजीनियरिंग सर्वे तकनीकों का वास्तविक और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
विश्वविद्यालय ने बताया कि यह कार्यक्रम छात्रों को केवल कक्षा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में इंजीनियरिंग की अवधारणाओं को लागू करने का अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे फील्ड आधारित प्रशिक्षण छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।




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