
विदेश में पढ़ाई करना लंबे समय से भारतीय छात्रों का सपना रहा है। बेहतर शिक्षा, वैश्विक अनुभव और आकर्षक करियर के अवसरों की उम्मीद में हर साल बड़ी संख्या में छात्र अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों का रुख करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। अब न केवल विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है, बल्कि पढ़ाई पूरी करने के बाद कई छात्र पहले की तुलना में जल्दी भारत लौटने का फैसला भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। विदेशों में बढ़ती पढ़ाई और रहने की लागत, सख्त होते इमिग्रेशन नियम, बदलता वैश्विक जॉब मार्केट और भारत में तेजी से बढ़ते करियर के अवसर छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।
विदेश में पढ़ाई को लेकर बदल रही है छात्रों की सोच
एमएसएम यूनिफाई (MSM Unify) के संस्थापक एवं निदेशक संजय लॉल का कहना है कि अब भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई को केवल स्थायी रूप से बसने का माध्यम नहीं मानते। पहले जहां विदेशी डिग्री का मतलब विदेश में नौकरी और वहीं करियर बनाना माना जाता था, वहीं अब छात्र निवेश और करियर के बीच संतुलन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
उनके अनुसार, आज के छात्र यह आकलन कर रहे हैं कि पढ़ाई पर होने वाला खर्च, नौकरी की संभावनाएं और भविष्य की आय एक-दूसरे के मुकाबले कितनी लाभदायक हैं। यदि भारत में बेहतर अवसर मिल रहे हैं, तो वे बिना देर किए वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं।
विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में साझा किए गए ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (Bureau of Immigration) के आंकड़ों के अनुसार, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में लगातार कमी आई है।
साल 2023 में लगभग 9.08 लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए थे। यह संख्या 2024 में घटकर करीब 7.7 लाख रह गई। वहीं 2025 में यह आंकड़ा और कम होकर लगभग 6.26 लाख तक पहुंच गया। यानी दो वर्षों के भीतर विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में करीब 31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय छात्र अब विदेश में शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में अधिक सोच-समझकर निर्णय ले रहे हैं।
क्यों जल्दी लौट रहे हैं भारतीय छात्र?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकप्रिय अध्ययन गंतव्यों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान वीजा और इमिग्रेशन नियम काफी सख्त हुए हैं। स्टडी वीजा से लेकर पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट तक कई नीतियों में बदलाव हुए हैं, जिससे पढ़ाई के बाद नौकरी हासिल करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग ने शुरुआती स्तर की कई नौकरियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए रोजगार की अनिश्चितता भी बढ़ी है। ऐसे में कई छात्र विदेश में लंबे समय तक रुकने के बजाय भारत लौटकर करियर शुरू करना बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
बढ़ती फीस और महंगाई भी बड़ा कारण
विदेश में पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। विश्वविद्यालयों की ट्यूशन फीस में वृद्धि के साथ-साथ आवास, भोजन, स्वास्थ्य बीमा और दैनिक जीवन का खर्च भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो गया है।
इसके अलावा रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्राओं के मजबूत होने से भारतीय छात्रों पर आर्थिक बोझ और बढ़ा है। कई देशों ने स्टूडेंट वीजा के लिए बैंक बैलेंस या फंड के प्रमाण की न्यूनतम राशि भी बढ़ा दी है। इसका असर खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ा है, जो अब विदेश में शिक्षा के निवेश और उसके संभावित लाभ का अधिक सावधानी से मूल्यांकन कर रहे हैं।
भारत में बढ़े हैं करियर के नए अवसर
भारत का रोजगार बाजार भी तेजी से बदल रहा है। देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC), एआई आधारित उद्योगों और स्टार्टअप इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार हुआ है। इससे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए भारत में भी अच्छी सैलरी और वैश्विक स्तर पर काम करने के अवसर बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब कई कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास विदेशी शिक्षा के साथ अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी हो। यही वजह है कि विदेश में पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में छात्र भारत लौटकर अपना करियर बनाना पसंद कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की अहमियत कम नहीं हुई
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में आई गिरावट का मतलब यह नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का महत्व कम हो गया है। बल्कि यह छात्रों की बदलती प्राथमिकताओं और व्यावहारिक सोच को दर्शाता है।
अब छात्र केवल विदेशी डिग्री हासिल करने के बजाय यह देख रहे हैं कि उनकी पढ़ाई, करियर और आर्थिक निवेश का वास्तविक लाभ कहां अधिक मिलेगा। यही कारण है कि कई भारतीय छात्र विदेश में शिक्षा पूरी करने के बाद पहले से जल्दी भारत लौटकर यहां उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना पसंद कर रहे हैं।




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