
डिजिटल प्लेटफॉर्म आज युवाओं के लिए जानकारी हासिल करने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं। ऐसे समय में दुनिया भर के शिक्षण संस्थान छात्रों के बीच मीडिया साक्षरता (Media Literacy), आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और अलग-अलग विचारों को समझने की क्षमता विकसित करने पर अधिक जोर दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम अक्सर लोगों को उनकी पहले से बनी सोच के अनुरूप ही कंटेंट दिखाते हैं, जिससे वे अलग दृष्टिकोण से जुड़ी जानकारी तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में छात्रों को निष्पक्ष तरीके से खबरों का मूल्यांकन करना सिखाना आधुनिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
इसी सोच के साथ अब छात्र भी ऐसे तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं, जो संतुलित और भरोसेमंद समाचार पढ़ने में मदद करें। ऐसा ही एक उदाहरण है Cogito News, जिसे अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित West Windsor-Plainsboro High School South के छात्र शौर्य जिंदल ने विकसित किया है।
एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ सफर
Cogito News की शुरुआत शौर्य जिंदल के व्यक्तिगत अनुभव से हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रवासी लोगों के साथ डिटेंशन सेंटरों में हो रहे कथित दुर्व्यवहार की आलोचना करते हुए एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट के बाद उन्हें अपने कुछ साथियों की नाराजगी और विरोध का सामना करना पड़ा।
इस घटना ने उन्हें यह समझने के लिए प्रेरित किया कि सार्वजनिक मुद्दों पर लोगों के विचार इतने ध्रुवीकृत क्यों होते जा रहे हैं। अपने शोध के दौरान उन्होंने पाया कि सोशल मीडिया के रिकमेंडेशन सिस्टम अक्सर उपयोगकर्ताओं को वही खबरें और विचार दिखाते हैं, जो उनकी मौजूदा सोच से मेल खाते हैं। इससे अलग दृष्टिकोण तक उनकी पहुंच सीमित हो जाती है।
2025 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट, कई चरणों में हुआ विकसित
शौर्य जिंदल ने वर्ष 2025 की गर्मियों में Cogito News पर काम शुरू किया। अगले दस महीनों में उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के पांच अलग-अलग संस्करण तैयार किए।
शुरुआत में यह केवल खबरों में पक्षपात (Bias) की पहचान करने वाला एक टूल था। बाद में इसमें कई नए फीचर जोड़े गए, जिनमें व्यक्तिगत समाचार फीड, राजनीतिक विचारों का आकलन करने वाला क्विज, पक्षपात के आधार पर खबरों की सिफारिश और बेहतर यूजर इंटरफेस शामिल हैं।
अलग सोच वाले स्रोतों से भी पढ़ने का मौका
इस प्लेटफॉर्म का Political Bias Quiz उपयोगकर्ता के राजनीतिक विचारों का आकलन करता है। यदि बायस फिल्टर चालू किया जाता है, तो यह ऐसे समाचार स्रोतों की खबरें भी सुझाता है, जिनका दृष्टिकोण उपयोगकर्ता की सोच से अलग होता है।
इसके अलावा प्लेटफॉर्म प्रत्येक खबर के साथ यह भी बताता है कि संबंधित समाचार स्रोत को किस प्रकार के राजनीतिक झुकाव वाला माना जाता है। इसका उद्देश्य पाठकों को यह समझने में मदद करना है कि खबर किस नजरिए से लिखी गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से करता है खबरों का विश्लेषण
Cogito News का एक और महत्वपूर्ण फीचर Bias Detector है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल पर आधारित है, जिसे राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े 12 अलग-अलग डेटा सेट पर प्रशिक्षित किया गया है।
यह टूल किसी भी दिए गए लेख या टेक्स्ट का विश्लेषण कर यह बताता है कि उसमें वामपंथी, दक्षिणपंथी या अपेक्षाकृत तटस्थ झुकाव है। साथ ही यह पंक्ति-दर-पंक्ति यह भी समझाता है कि उसने अपने निष्कर्ष तक कैसे पहुंचा। इससे उपयोगकर्ताओं को एआई के निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
शिक्षा में भी हो रहा है इस्तेमाल
यह प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका उपयोग शुरू हो चुका है।
शौर्य जिंदल के स्कूल के डिबेट क्लब के सदस्य विभिन्न विषयों पर बहस की तैयारी के दौरान स्रोतों का विश्लेषण करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा उनके एक शिक्षक ने मीडिया साक्षरता पढ़ाने के लिए इसे पत्रकारिता की कक्षा में अध्ययन सामग्री के रूप में शामिल किया। बाद में इस पहल को स्कूल के समाचार पत्र में भी जगह मिली।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिल रही पहचान
अप्रैल 2026 में शौर्य जिंदल #ListenFirst Coalition से जुड़े। यह नेटवर्क वर्ष 2017 में अमेरिका में नागरिक संवाद को बढ़ावा देने और राजनीतिक ध्रुवीकरण को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
इस मंच के माध्यम से उन्होंने AllSides और Ground News जैसी संस्थाओं के साथ चर्चा में भाग लिया, जहां समाचारों को अधिक संतुलित और जिम्मेदारी के साथ लोगों तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार किया गया।
डिजिटल शिक्षा में छात्रों की बढ़ती भूमिका
दुनिया भर के स्कूलों में डिजिटल साक्षरता और मीडिया शिक्षा पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऐसे समय में Cogito News जैसे छात्र-नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट यह दिखाते हैं कि नई पीढ़ी केवल तकनीक का उपयोग ही नहीं कर रही, बल्कि जिम्मेदार सूचना उपभोग, विश्वसनीय स्रोतों की पहचान और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सकारात्मक भूमिका को भी आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है।




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