
सीमित संसाधन, इंटरनेट की कमी और एक छोटा-सा गांव। आमतौर पर ऐसी परिस्थितियां बड़े सपनों के रास्ते में चुनौती बनती हैं, लेकिन कर्नाटक के चिक्कमगलूर जिले के अलदूर गांव के रहने वाले अवैस अहमद ने इन्हें अपनी ताकत बना लिया। बचपन में लालटेन की रोशनी में अंतरिक्ष से जुड़ी किताबें पढ़ने वाले अवैस आज भारत के सबसे चर्चित स्पेस टेक उद्यमियों में शामिल हैं। उनकी कंपनी Pixxel (पिक्सेल) आज पृथ्वी की हाई-रिजॉल्यूशन हाइपरस्पेक्ट्रल तस्वीरें लेने वाले अत्याधुनिक सैटेलाइट विकसित कर रही है और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है।
किताबों ने जगाई अंतरिक्ष की जिज्ञासा
अवैस अहमद का बचपन कर्नाटक के अलदूर गांव में बीता, जहां उस समय इंटरनेट जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। उनके पिता छोटा कारोबार करते थे, लेकिन उन्होंने अपने बेटे की जिज्ञासा को हमेशा प्रोत्साहित किया। वे अंतरिक्ष, ग्रहों और ब्रह्मांड से जुड़ी किताबें और एनसाइक्लोपीडिया घर लाते थे।
अवैस घंटों इन किताबों में डूबे रहते। तारों, ग्रहों और अंतरिक्ष के रहस्यों को जानने की उनकी उत्सुकता समय के साथ और गहरी होती गई। आठवीं कक्षा में पहली बार इंटरनेट तक पहुंच मिली, लेकिन तब तक पढ़ने की आदत उनकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी थी।
BITS से IIT मद्रास तक का सफर
स्कूल की पढ़ाई के बाद अवैस ने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (BITS), पिलानी में गणित की पढ़ाई शुरू की। बाद में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में उच्च शिक्षा हासिल की।
आईआईटी मद्रास में पढ़ाई के दौरान वह छात्र सैटेलाइट परियोजना ‘अनंत’ से जुड़े, जहां उन्हें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ काम करने और अंतरिक्ष तकनीक को करीब से समझने का अवसर मिला। इसके अलावा उन्होंने Hyperloop India टीम में इंजीनियरिंग लीड की भूमिका निभाई। उनकी टीम SpaceX Hyperloop Pod Competition के फाइनल तक पहुंची, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
एक समस्या से जन्मी Pixxel
आईआईटी में पढ़ाई के दौरान अवैस ने महसूस किया कि जलवायु परिवर्तन, कृषि, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े शोध के लिए उच्च गुणवत्ता वाला सैटेलाइट डेटा आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए उन्होंने वर्ष 2019 में अपने साथी क्षितिज खंडेलवाल के साथ बेंगलुरु में Pixxel की स्थापना की।
कंपनी का लक्ष्य ऐसे हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट बनाना था, जो पृथ्वी की सतह की बेहद सूक्ष्म और विस्तृत तस्वीरें लेकर वैज्ञानिकों, उद्योगों और सरकारों को बेहतर डेटा उपलब्ध करा सकें।
वैश्विक स्तर पर मिली पहचान
शुरुआती दौर में कंपनी को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 2022 में उसे लगभग 2.7 करोड़ डॉलर (27 मिलियन डॉलर) की सीरीज-ए फंडिंग मिली, जिसने कंपनी की रफ्तार बढ़ा दी।
इसके बाद Pixxel ने लगातार कई निवेश दौर पूरे किए और अब तक कंपनी 900 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटा चुकी है। कंपनी को Google सहित कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का समर्थन मिला है।
Pixxel के विकसित हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट आज पृथ्वी की निगरानी, जलवायु परिवर्तन, कृषि, खनन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उपयोगी डेटा उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के साथ भी सहयोग किया है और उसके डेटा कार्यक्रमों में अपनी तकनीक उपलब्ध कराई है।
भारत के निजी स्पेस सेक्टर की बड़ी सफलता
भारत में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के तेजी से विस्तार के बीच Pixxel उन स्टार्टअप्स में शामिल है, जिन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय तकनीक की मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी के Firefly सैटेलाइट मिशन और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
अवैस अहमद की कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपनों के लिए महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी सीखने की इच्छा, मेहनत और समस्याओं का समाधान खोजने की सोच होती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अवैस अहमद का सफर बताता है कि सफलता केवल बड़े शहरों या आधुनिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है। जिज्ञासा, किताबों से दोस्ती, लगातार सीखने की आदत और कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने का संकल्प किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। आज उनका सफर देश के लाखों युवाओं के लिए इस बात का उदाहरण है कि सही सोच और लगातार प्रयास से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।




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