
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले पर आज फिर सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत के समक्ष वांगचुक के स्वास्थ्य, उनके अनशन और सरकार की जिम्मेदारी से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
अस्पताल में भर्ती कराने और फोर्स-फीडिंग की मांग
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए। साथ ही, यदि उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक हो तो उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में फोर्स-फीडिंग (जबरन भोजन) की अनुमति दी जाए।
याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की भी मांग की गई है, ताकि वांगचुक के जीवन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका अनशन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है।
वांगचुक का समर्थन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है। संगठन का आरोप है कि मई में हुई कथित परीक्षा पेपर लीक की घटनाओं से लाखों छात्र प्रभावित हुए और इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
बिगड़ती सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार चल रहे अनशन के कारण वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उन्हें मांसपेशियों में दर्द की शिकायत है और उनका ब्लड प्रेशर 109/70 दर्ज किया गया है।
उनके समर्थकों और कई सामाजिक संगठनों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन वांगचुक अब तक अपने फैसले पर कायम हैं।
20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
आंदोलन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
प्रदर्शनकारियों की निगरानी पर भी हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इसी बीच, जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में अलग याचिका दायर की है। इसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की कथित लगातार निगरानी, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी टावर के संचालन को चुनौती दी गई है।
याचिका में मांग की गई है कि सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान अंधाधुंध निगरानी को असंवैधानिक घोषित किया जाए। साथ ही अदालत से ऐसी निगरानी पर रोक लगाने और भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों से जुड़े मुद्दों, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों से भी जुड़ा है। अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हैं।




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