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झारखंड में जेंडर-समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की तैयारी, सरकारी स्कूलों के लिए तैयार हुआ नया SOP ड्राफ्ट

Preparations underway to promote gender-inclusive education in Jharkhand; new SOP draft ready for government schools

झारखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में जेंडर-समावेशी (Gender-Inclusive) शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का मसौदा तैयार किया है। इसका उद्देश्य छात्रों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला शिक्षण वातावरण तैयार करना है।

यह ड्राफ्ट झारखंड काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (JCERT) द्वारा तैयार किया गया है। इसमें स्कूलों के दैनिक संचालन में जेंडर-संवेदनशील (Gender-Sensitive) प्रक्रियाओं को शामिल करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा दी गई है। प्रस्तावित दिशानिर्देशों में कक्षा में सभी छात्रों की समान भागीदारी, स्कूल सुरक्षा, सीखने के अवसरों तक बराबर पहुंच और जेंडर आधारित भेदभाव की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

ड्राफ्ट के अनुसार, स्कूलों को ऐसे कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनसे सभी छात्रों के साथ उनके जेंडर की परवाह किए बिना सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जा सके। इस रूपरेखा का उद्देश्य शिक्षकों और स्कूल स्टाफ के बीच जेंडर संवेदनशीलता तथा बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

प्रस्तावित SOP में स्कूल प्रबंधन, शिक्षण पद्धति और छात्रों की सहभागिता में जेंडर-समावेशी दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही स्कूलों में भेदभाव, उत्पीड़न और सुरक्षा से जुड़े मामलों की शिकायत दर्ज करने तथा उनके समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

यह पहल राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में काम करेगी। इसके माध्यम से स्कूल समावेशी शिक्षा और छात्र कल्याण से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगे।

हाल के वर्षों में स्कूल शिक्षा में जेंडर समावेशन एक महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीतियां भी सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर, सुरक्षित शिक्षण वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक बराबर पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देती हैं। झारखंड का यह प्रस्तावित SOP इन्हीं व्यापक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसमें ऐसे व्यावहारिक उपाय सुझाए गए हैं, जिन्हें स्कूल अपने परिसर को अधिक समावेशी बनाने के लिए अपनाएंगे।

SOP को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह सरकारी स्कूलों को जेंडर समानता से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने में मार्गदर्शन देगा। साथ ही, यह छात्रों के शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक शिक्षण वातावरण तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

 

 

Asmita Sarkar

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