
SHANTI Act 2025 (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India) के लागू होने के बाद भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस कानून के जरिए पहली बार निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता खुला है, जिससे न केवल निवेश बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि रोजगार और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों के सामने नई चुनौती भी होगी। उन्हें ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने होंगे, जो पारंपरिक परमाणु इंजीनियरिंग के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल ट्विन, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स और डेटा आधारित तकनीकों में भी दक्ष हों।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से बढ़ेंगे करियर के अवसर
केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की घोषणा की थी। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करना और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को समर्थन देना है।
सरकार इस मिशन के तहत देश की परमाणु क्षमता बढ़ाने, निजी कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसी आधुनिक परमाणु तकनीकों के विकास पर जोर दे रही है। SMR पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में छोटे, अधिक लचीले और कई मामलों में लागत के लिहाज से अधिक प्रभावी माने जाते हैं।
IIT हैदराबाद ने शुरू किया विशेष कोर्स
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए IIT हैदराबाद ने क्रिमसन टेक्नोलॉजीज के सहयोग से तीन महीने का आवासीय सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी शुरू किया है।
संस्थान के निदेशक प्रो. बी.एस. मूर्ति के अनुसार, भविष्य में इसे मास्टर डिग्री कार्यक्रम तक विस्तारित करने की योजना है। उनका कहना है कि अब परमाणु क्षेत्र में केवल डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) ही नहीं, बल्कि निजी उद्योगों में भी विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि जैसे अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में नीति सुधारों के बाद निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी, उसी तरह अगले कुछ वर्षों में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी तेज विस्तार देखने को मिल सकता है। IIT हैदराबाद भविष्य में परमाणु तकनीक अनुसंधान केंद्र स्थापित करने और आवश्यक मंजूरी मिलने पर कैंपस में माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टर स्थापित करने की दिशा में भी काम करना चाहता है।
IIT दिल्ली भी शुरू कर सकता है नए कार्यक्रम
IIT दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि परमाणु क्षेत्र में हुए सुधार इंजीनियरों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर लेकर आएंगे। संस्थान पीजी डिप्लोमा और एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम शुरू करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है, ताकि कार्यरत इंजीनियर भी इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।
उन्होंने बताया कि IIT दिल्ली पहले से ही प्लाज्मा साइंस, रिएक्टर इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों में शोध कर रहा है। संस्थान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी (DAE) और एलएंडटी (L&T) जैसी संस्थाओं के साथ विभिन्न परियोजनाओं पर सहयोग कर रहा है। अगले एक-दो वर्षों में इनमें से कई पहलें आगे बढ़ने की उम्मीद है।
नई तकनीकों में होगी विशेषज्ञों की जरूरत
IIT खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती का कहना है कि भविष्य के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा।
उनके अनुसार, रिएक्टर इंजीनियरिंग, रेडिएशन फिजिक्स और न्यूक्लियर सेफ्टी के साथ-साथ AI, डिजिटल ट्विन, एडवांस्ड सिमुलेशन, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, साइबर सुरक्षा, रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस इंस्पेक्शन सिस्टम और डेटा आधारित प्लांट ऑपरेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का ज्ञान भी जरूरी होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियरिंग के साथ-साथ नियामकीय ढांचे, पर्यावरणीय स्थिरता, जोखिम मूल्यांकन, गुणवत्ता नियंत्रण, परियोजना प्रबंधन और सिस्टम इंजीनियरिंग की समझ भी भविष्य के पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण होगी।
एमिटी यूनिवर्सिटी भी तैयार कर रही है विशेषज्ञ
एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी में BTech, MTech और PhD जैसे कार्यक्रम संचालित कर रहा है।
संस्थान की निदेशक प्रो. अल्पना गोयल के अनुसार, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के सुरक्षित और टिकाऊ विकास के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और माइक्रो रिएक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की मांग आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी।
सार्वजनिक भरोसा भी रहेगा अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन का सुरक्षा रिकॉर्ड मजबूत रहा है, लेकिन इस क्षेत्र के विस्तार के लिए लोगों का विश्वास भी उतना ही जरूरी है। इसलिए तकनीकी विकास के साथ-साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जन-जागरूकता पर भी बराबर ध्यान देना होगा।
यदि SHANTI Act 2025 के तहत प्रस्तावित सुधार प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र की तरह तेज़ी से आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही इंजीनियरिंग, शोध और तकनीकी शिक्षा से जुड़े छात्रों के लिए नए करियर विकल्प भी खुलेंगे।




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