
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही चर्चाओं पर राज्य सरकार ने विराम लगा दिया है। सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्पष्ट किया कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल नाम परिवर्तन से जुड़ा कोई प्रस्ताव सरकार के स्तर पर विचाराधीन नहीं है।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ किए जाने की अटकलें लगातार सामने आ रही थीं।
विधानसभा में विपक्ष ने उठाया था मुद्दा
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने सरकार से सवाल किया कि क्या बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदला जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि ऐसा है तो नया नाम क्या होगा और करीब 35 साल बाद नाम बदलने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है।
इसके जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई फैसला नहीं लिया है। इसलिए नए नाम या उसके कारणों का प्रश्न ही नहीं उठता।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी विश्वविद्यालय का नाम बदलना हो, तो इसके लिए संबंधित अधिनियम (Act) में संशोधन करने के लिए विधानसभा में विधेयक लाना आवश्यक होगा।
किसके नाम पर है बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी?
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम स्वतंत्रता सेनानी प्रो. बरकतुल्लाह भोपाली के सम्मान में रखा गया है। प्रो. बरकतुल्लाह भोपाली भारत की पहली निर्वासित (प्रोविजनल) सरकार, जो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान काबुल में गठित हुई थी, के प्रधानमंत्री रहे थे।
इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1970 में भोपाल यूनिवर्सिटी के नाम से हुई थी। बाद में 1988 में इसका नाम बदलकर बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी कर दिया गया।
नाम बदलने का प्रस्ताव पहले मिल चुका है मंजूरी
हालांकि सरकार ने विधानसभा में नाम बदलने से इनकार किया है, लेकिन इससे पहले विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) विश्वविद्यालय का नाम बदलने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी थी। प्रस्ताव में विश्वविद्यालय का नाम ‘वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ रखने की सिफारिश की गई थी।
इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल के पास भेजा गया था।
प्रस्ताव के समर्थन में यह तर्क दिया गया था कि राजा भोज मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के प्रमुख प्रतीक हैं। इसी कारण विश्वविद्यालय का नाम उनसे जोड़ने का सुझाव रखा गया था।
फिलहाल नाम परिवर्तन पर विराम
विधानसभा में सरकार के ताजा जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का फिलहाल कोई सरकारी निर्णय नहीं है। हालांकि विश्वविद्यालय स्तर पर पारित प्रस्ताव का भविष्य क्या होगा, यह आगे सरकार और विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों के लिए विश्वविद्यालय का नाम पहले की तरह बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी ही रहेगा।




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