
NEET UG 2026 Paper Leak Case: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले में सोमवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली सुनवाई हुई। हालांकि, सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से कोई अभियोजक (प्रॉसिक्यूटर) अदालत में मौजूद नहीं था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए CBI के निदेशक अभियोजन (Director of Prosecution) को मामले में राज्य की ओर से अभियोजक नियुक्त करने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 तक के लिए स्थगित कर दी।
यह मामला हाल ही में गठित उस विशेष अदालत में पहली बार सूचीबद्ध हुआ, जिसे Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाया गया है।
जमानत याचिका पर नहीं हो सकी सुनवाई
विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा की अदालत में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी। लेकिन CBI की ओर से कोई प्रॉसिक्यूटर उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत इस पर सुनवाई नहीं कर सकी।
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.पी. सिंह अदालत में पेश हुए। अब दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।
हाल ही में गठित हुई है विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में 23 जुलाई 2026 को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया था।
अब Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई इसी अदालत में की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
अब तक 13 आरोपी गिरफ्तार
CBI की जांच के अनुसार, NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें दिनेश बिवाल और विकास बिवाल भी शामिल हैं।
अदालत पहले ही सभी आरोपियों को 6 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। इससे पहले 17 जुलाई को अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका पर CBI से जवाब मांगा था।
CBI ने क्या लगाए हैं आरोप?
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास बिवाल को NEET UG का प्रश्नपत्र दिलाने के लिए शुभम खैरनार से संपर्क किया था।
CBI का दावा है कि जांच के दौरान मांगीलाल के मोबाइल फोन से प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। एजेंसी का आरोप है कि उसने यश यादव से करीब 10 लाख रुपये में लीक प्रश्नपत्र खरीदा था।
पूछताछ में विकास बिवाल ने कथित तौर पर बताया कि उसकी मुलाकात यश यादव से राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी।
जांच में सामने आई कथित पेपर लीक की श्रृंखला
CBI की जांच के मुताबिक, पेपर लीक की पूरी कड़ी भी सामने आई है। एजेंसी का आरोप है कि सबसे पहले शुभम खैरनार ने प्रश्नपत्र यश यादव तक पहुंचाया। इसके बाद यश यादव ने इसे मांगीलाल बिवाल को दिया। फिर मांगीलाल ने कथित तौर पर यह प्रश्नपत्र अपने बेटे विकास बिवाल और बाद में दिनेश बिवाल तक पहुंचाया।
CBI का यह भी आरोप है कि मांगीलाल ने बाद में यही लीक प्रश्नपत्र अन्य अभ्यर्थियों को 12 लाख रुपये तक में बेचा।
इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और मामले की सुनवाई जारी है।
12 मई को दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में 12 मई 2026 को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 सहित अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
यश यादव को परीक्षा और बहन की शादी में मिली थी राहत
मामले में गिरफ्तार आरोपी यश यादव को अदालत ने न्यायिक हिरासत के दौरान 21 जून को NEET UG परीक्षा में शामिल होने और 22 जून को अपनी बहन की शादी में शामिल होने की विशेष अनुमति दी थी।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की नजर 3 अगस्त 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट दिनेश और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।




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