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NTA Exam Reforms: IIT Madras Director says every mark will now be accounted for

NTA Exam Reforms: IIT Madras के निदेशक बोले- अब हर अंक का होगा हिसाब, तकनीक से बनेगी पारदर्शी परीक्षा प्रणाली

NTA Exam Reforms: IIT Madras Director says every mark will now be accounted for

NTA Exam Reforms 2026: देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने सुधार प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में परीक्षा सुधारों के लिए गठित विशेषज्ञ समिति में आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को शामिल किया गया है। उनका कहना है कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर छात्र को यह स्पष्ट जानकारी मिल सके कि उसे मिले अंक किस आधार पर दिए गए हैं।

हाल के वर्षों में NEET-UG समेत कई बड़ी परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था को तकनीक के माध्यम से अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रही है।

हर छात्र को मिले अंकों का स्पष्ट आधार

प्रो. वी. कामकोटी ने कहा कि विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य केवल तकनीकी बदलाव करना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र को 90 अंक मिलते हैं, तो परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी को यह बताने में सक्षम होना चाहिए कि यह अंक किस प्रक्रिया और मूल्यांकन के आधार पर दिए गए। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से ही संभव हो सकती है।

चार सिद्धांतों पर तैयार होगी नई परीक्षा प्रणाली

प्रो. कामकोटी के अनुसार, केंद्र सरकार ने विशेषज्ञ समिति को ऐसी परीक्षा प्रणाली विकसित करने की जिम्मेदारी दी है, जो चार प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित होगी—

  • पूरी तरह पारदर्शी (Transparent)
  • मजबूत और विश्वसनीय (Robust)
  • पेपर लीक से सुरक्षित (Leak-proof)
  • आधुनिक तकनीक आधारित (Technology-driven)

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को भी उसी स्तर पर अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाना जरूरी है।

NEET-UG से मिले अनुभवों के आधार पर होंगे सुधार

प्रो. कामकोटी ने कहा कि NEET-UG 2024 के दौरान प्रश्नपत्र वितरण से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। बाद में जांच एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कथित लीक का प्रभाव सीमित संख्या में अभ्यर्थियों तक रहा। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूरे परीक्षा परिणाम को रद्द करने या दोबारा परीक्षा कराने की आवश्यकता नहीं मानी थी।

इन घटनाओं के बाद शिक्षा मंत्रालय ने डॉ. के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। समिति ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगभग 200 सिफारिशें दी थीं। इनमें से कई सुझावों को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) लागू कर चुकी है, जिससे प्रश्नपत्र वितरण और सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक मजबूत बनाया गया है।

2026 में सबसे बड़ी चुनौती बनी प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया

प्रो. कामकोटी का कहना है कि हालिया घटनाओं से यह स्पष्ट हुआ है कि केवल प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली को सुरक्षित बनाना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने बताया कि किसी भी परीक्षा प्रणाली में दो स्तर सबसे महत्वपूर्ण होते हैं—पहला, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ और दूसरा, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी रखने वाले निरीक्षक।

उनके अनुसार, परीक्षा केंद्रों की निगरानी के लिए कैमरे और अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग किया जा रहा है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में पूर्ण गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।

क्या AI पूरी तरह प्रश्नपत्र तैयार कर सकता है?

प्रो. कामकोटी ने इस सवाल पर भी अपनी राय रखी कि क्या भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पूरी तरह प्रश्नपत्र तैयार कर सकता है।

उन्होंने कहा कि AI प्रश्न तैयार करने में सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन अंतिम प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी उसे नहीं दी जा सकती। प्रश्नों की गुणवत्ता, सही उत्तरों का सत्यापन और विभिन्न भाषाओं में सटीक अनुवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब भी विशेषज्ञों द्वारा ही किए जाने चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि NEET जैसी परीक्षा कई भारतीय भाषाओं में आयोजित होती है। इसलिए हर भाषा में प्रश्नों की शुद्धता और समान अर्थ सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

अगले परीक्षा सत्र से पहले लागू हो सकते हैं बदलाव

प्रो. कामकोटी ने बताया कि अगला प्रमुख परीक्षा सत्र दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। इससे पहले विशेषज्ञ समिति विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारों पर काम करेगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक होने पर संसद स्तर पर भी कानूनी बदलाव किए जा सकते हैं।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये सुधार?

पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों ने लाखों छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा की है। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनती है, तो इससे छात्रों का भरोसा बढ़ेगा और मूल्यांकन प्रणाली भी अधिक विश्वसनीय होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, बेहतर डेटा सुरक्षा और स्पष्ट मूल्यांकन प्रणाली भविष्य की राष्ट्रीय परीक्षाओं को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

 

Asmita Sarkar

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