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AIBE XXI 2026 Results: Pass percentage drops for the third consecutive year

AIBE XXI 2026 Result: लगातार तीसरे साल घटा पास प्रतिशत, 1.75 लाख में से केवल 1.15 लाख उम्मीदवार हुए सफल

AIBE XXI 2026 Results: Pass percentage drops for the third consecutive year

AIBE XXI Result 2026: ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) XXI के नतीजों ने एक बार फिर कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके अभ्यर्थियों के सामने बढ़ती चुनौतियों को उजागर किया है। जून 2026 सत्र में परीक्षा देने वाले करीब 1.75 लाख उम्मीदवारों में से केवल 1,15,805 अभ्यर्थी ही सफल हो सके। इस तरह परीक्षा का कुल पास प्रतिशत 65.92 फीसदी रहा। खास बात यह है कि परिणाम जारी करने से पहले मॉनिटरिंग कमेटी ने सभी वर्गों के लिए कटऑफ में तीन अंकों की राहत दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह छूट नहीं दी जाती, तो सफलता दर और भी कम हो सकती थी।

लगातार तीसरे वर्ष कम हुआ पास प्रतिशत

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित AIBE वकालत के पेशे में प्रवेश के लिए अनिवार्य परीक्षा मानी जाती है। पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों का प्रतिशत लगातार घट रहा है। इसके पीछे प्रश्नों के बदलते स्वरूप, नए कानूनों का समावेश और समय प्रबंधन जैसी कई वजहें सामने आ रही हैं।

प्रश्नों के बदलते पैटर्न ने बढ़ाई चुनौती

कानूनी शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि AIBE में अब केवल तथ्यों पर आधारित प्रश्न नहीं पूछे जा रहे हैं। हाल के वर्षों में परीक्षा को अधिक व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक बनाने पर जोर दिया गया है।

इस बार परीक्षा में केस-आधारित प्रश्नों के साथ-साथ असर्शन-रीजनिंग, सही क्रम चुनने, मैचिंग और गलत विकल्प पहचानने जैसे प्रश्न शामिल किए गए। इनका उद्देश्य केवल उम्मीदवारों की जानकारी जांचना नहीं था, बल्कि उनकी कानूनी समझ, तर्क क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता का मूल्यांकन करना भी था। कई अभ्यर्थी इस नए प्रारूप के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके, जिसका असर परिणामों में दिखाई दिया।

नए आपराधिक कानूनों से जुड़ी तैयारी रही कमजोर

AIBE XXI पहला ऐसा सत्र था जिसमें भारत के नए आपराधिक कानूनों को प्रमुखता से शामिल किया गया। परीक्षा में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) से जुड़े प्रश्न पूछे गए।

हालांकि उम्मीदवारों को पहले से बताया गया था कि पुराने और नए दोनों कानूनों से प्रश्न आ सकते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने अपनी तैयारी पुराने अध्ययन सामग्री के आधार पर की थी। नए कानूनों में धाराओं और क्रम संख्या में बदलाव होने के कारण परीक्षा के दौरान कई उम्मीदवारों को उत्तर खोजने और सही प्रावधान पहचानने में कठिनाई हुई।

ओपन बुक परीक्षा होने के बावजूद समय बना बड़ी बाधा

AIBE एक ओपन बुक परीक्षा है, जिसमें उम्मीदवार अपने साथ Bare Acts लेकर परीक्षा केंद्र जा सकते हैं। इसके बावजूद इस बार समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा।

परीक्षा में 100 प्रश्नों को हल करने के लिए 3 घंटे 30 मिनट का समय दिया जाता है। यानी प्रत्येक प्रश्न के लिए औसतन दो मिनट से थोड़ा अधिक समय उपलब्ध होता है। ऐसे में जो उम्मीदवार हर प्रश्न का उत्तर Bare Acts में खोजने पर निर्भर रहे, उनका काफी समय दस्तावेज़ों को देखने में ही खर्च हो गया। दूसरी ओर, जिन उम्मीदवारों ने पहले से विषयों की गहरी तैयारी की थी, वे आवश्यक प्रावधान जल्दी पहचानकर समय बचाने में सफल रहे।

कटऑफ में तीन अंकों की राहत के बाद जारी हुआ परिणाम

परिणाम घोषित करने से पहले मॉनिटरिंग कमेटी ने सभी वर्गों के उम्मीदवारों को राहत देने का फैसला किया। इसके तहत सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए न्यूनतम पासिंग अंक 45 से घटाकर 42 कर दिए गए।

वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कटऑफ 40 से घटाकर 37 अंक कर दी गई। इसी संशोधित कटऑफ के आधार पर अंतिम परिणाम जारी किए गए।

1.75 लाख उम्मीदवारों ने दी परीक्षा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार AIBE XXI 2026 में कुल 1,75,701 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 1,15,805 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जबकि 59,876 उम्मीदवार परीक्षा पास नहीं कर सके। परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के इस्तेमाल के 20 मामले भी दर्ज किए गए।

जेंडर के आधार पर AIBE XXI 2026 का प्रदर्शन

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार परीक्षा में पुरुष उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक रही। कुल 1,10,909 पुरुष उम्मीदवारों में से 73,045 सफल रहे। वहीं 64,784 महिला उम्मीदवारों में से 42,757 ने परीक्षा पास की। परीक्षा में शामिल 8 ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों में से 3 सफल रहे।

अनुचित साधनों के उपयोग के मामलों में 15 मामले पुरुष उम्मीदवारों और 5 मामले महिला उम्मीदवारों से जुड़े पाए गए, जबकि ट्रांसजेंडर श्रेणी में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

क्या संकेत देते हैं ये नतीजे?

AIBE XXI के नतीजे यह संकेत देते हैं कि केवल कानून की किताबों का सामान्य अध्ययन अब पर्याप्त नहीं है। बदलते परीक्षा पैटर्न, नए आपराधिक कानूनों की समझ और प्रभावी समय प्रबंधन सफलता के लिए पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी परीक्षा का फोकस कानूनी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता पर बना रह सकता है। ऐसे में उम्मीदवारों को तैयारी की रणनीति में बदलाव करना होगा।

 

Asmita Sarkar

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