
तूलु यक्षगान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने के उद्देश्य से एलायंस यूनिवर्सिटी ने तूलु वर्ल्ड फाउंडेशन और तूलुवेरे चावड़ी तेंकाई बोम्मासंद्रा के सहयोग से एक विशेष कार्यशाला और पारंपरिक यक्षगान प्रस्तुति का आयोजन किया।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक विशेषज्ञों और विद्वानों ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया, जिनमें छात्रों को तूलु संस्कृति, लोककथाओं, भाषा, इतिहास और प्रदर्शन कलाओं के विकास तथा महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को कर्नाटक की समृद्ध लोक परंपराओं में से एक तूलु यक्षगान की गहरी समझ प्रदान करना और इसकी आज के समय में सांस्कृतिक प्रासंगिकता से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मंगलुरु के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यक्षगान प्रसंग ‘सिरी कृष्णे चंदापाली’ रहा। इस मनमोहक प्रस्तुति ने यक्षगान की विशिष्ट कहानी कहने की शैली, संगीत, नृत्य और रंगमंचीय परंपराओं को दर्शाया। यही विशेषताएं यक्षगान को भारत की सबसे लोकप्रिय और सम्मानित लोक कला परंपराओं में शामिल करती हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य छात्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने और समझने के लिए प्रेरित करना था। साथ ही क्षेत्रीय भाषाओं, लोककथाओं और पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन पर भी विशेष जोर दिया गया।
इस कार्यक्रम ने विद्वानों, कलाकारों और छात्रों को एक साझा मंच पर लाकर पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी ऐतिहासिक गहराई को करीब से समझने का अवसर मिला।
एलायंस यूनिवर्सिटी ने कहा कि इस तरह की पहलें कक्षा से बाहर सीखने के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।




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