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DTU launches new executive programs on clean energy and corporate sustainability

DTU ने शुरू किए स्वच्छ ऊर्जा और कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी पर नए एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम, वैश्विक प्रोफेशनल्स ले रहे हिस्सा

DTU launches new executive programs on clean energy and corporate sustainability

DTU Executive Education Program: दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) ने स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में काम कर रहे पेशेवरों के लिए दो नए एग्जीक्यूटिव शिक्षा कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य उद्योग जगत की बदलती जरूरतों के अनुरूप विशेषज्ञता विकसित करना और पेशेवरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

ये कार्यक्रम विश्वविद्यालय के डिजिटल एजुकेशन विभाग के अंतर्गत संचालित सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एन्हांस्ड लर्निंग (CTEL) द्वारा शैक्षणिक प्रौद्योगिकी मंच VCNOW के सहयोग से आयोजित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह पहल ऊर्जा परिवर्तन, हरित विकास और सतत व्यवसायिक मॉडल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है।

छह महीने का होगा कार्यक्रम

दोनों एग्जीक्यूटिव कार्यक्रमों की अवधि छह महीने रखी गई है। पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि कार्यरत पेशेवर अपनी नौकरी के साथ-साथ इसे आसानी से पूरा कर सकें।

कार्यक्रम में प्रत्येक रविवार को लाइव ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा प्रतिभागियों को तीन दिवसीय कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे विशेषज्ञों और शिक्षकों के साथ सीधे संवाद कर सकेंगे। पाठ्यक्रम में छह अकादमिक मॉड्यूल और एक प्रायोगिक परियोजना (Capstone Project) भी शामिल है, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अनुभव मिलेगा।

विश्वविद्यालय के अनुसार पहले बैच का ओरिएंटेशन सत्र सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के प्रति उत्साह दिखाया है।

स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगी विशेषज्ञता

डीटीयू के कुलपति Prateek Sharma ने कहा कि विश्वविद्यालय की 85 वर्षों से अधिक पुरानी शैक्षणिक विरासत, शोध क्षमता और उद्योग से जुड़ाव इन कार्यक्रमों को विशेष बनाता है। उनके अनुसार, ये पाठ्यक्रम नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा प्रबंधन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में पेशेवर विशेषज्ञता को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने में भी योगदान देगी।

उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया पाठ्यक्रम

डीटीयू की डीन (डिजिटल एजुकेशन) S. Indu ने बताया कि विश्वविद्यालय तकनीक आधारित और उद्योग-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि प्रतिभागियों को स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन प्रबंधन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी से जुड़े आधुनिक विषयों की व्यावहारिक समझ मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिल रही भागीदारी

कार्यक्रम में केवल भारत ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पेशेवर भी शामिल हुए हैं। प्रतिभागी ऊर्जा, विनिर्माण, नियामक संस्थाओं, उच्च शिक्षा, रक्षा सेवाओं और ग्रीन फाइनेंस जैसे विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा और सस्टेनेबिलिटी को लेकर बढ़ती प्राथमिकता के बीच ऐसे कार्यक्रम पेशेवरों को नए अवसरों और नेतृत्व भूमिकाओं के लिए तैयार कर सकते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। ऐसे में उद्योगों और संस्थानों को ऐसे पेशेवरों की जरूरत है जो तकनीक, नीति और सस्टेनेबिलिटी के बीच संतुलन बनाकर काम कर सकें।

डीटीयू के ये नए एग्जीक्यूटिव कार्यक्रम इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शुरू किए गए हैं। विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह पहल स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में कुशल नेतृत्व तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

 

Asmita Sarkar

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