
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए IIT खड़गपुर के एक छात्र को मेडिकल आधार पर IIT रुड़की में ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि छात्र की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और उपचार को ध्यान में रखते हुए उसे संस्थान बदलने की अनुमति देना न्याय के हित में होगा।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए आर्किटेक्चर के छात्र के पक्ष में आदेश जारी किया। अदालत ने IIT खड़गपुर को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर ट्रांसफर और माइग्रेशन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाणपत्र जारी करे, ताकि छात्र IIT रुड़की में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सके।
इलाज और पारिवारिक सहयोग के लिए मांगी थी ट्रांसफर की अनुमति
याचिकाकर्ता छात्र ने अदालत को बताया कि वह ‘बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ (Borderline Personality Disorder) से पीड़ित है। इस मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के इलाज के लिए उसे विशेष चिकित्सा सुविधा और परिवार की नियमित देखरेख की आवश्यकता है। छात्र का कहना था कि IIT खड़गपुर में रहते हुए उसे आवश्यक उपचार और पारिवारिक सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिसके कारण उसकी स्वास्थ्य स्थिति प्रभावित हो रही थी।
याचिका में बताया गया कि छात्र को रिपेटिटिव ट्रांसक्रानियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) थेरेपी की जरूरत है। यह एक विशेष उपचार पद्धति है, जिसका उपयोग कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है। छात्र का तर्क था कि IIT रुड़की में स्थानांतरण होने पर वह अपने माता-पिता के करीब रह सकेगा और इलाज बेहतर तरीके से जारी रख पाएगा।
कोर्ट ने स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए छात्र को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराना और ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करना न्यायसंगत होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य संबंधी विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया गया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि IIT खड़गपुर एक सप्ताह के भीतर छात्र को ट्रांसफर और माइग्रेशन से जुड़े सभी आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करे। इसके बाद छात्र IIT रुड़की में प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी कर सकेगा।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र को IIT रुड़की में प्रवेश के दौरान फीस संरचना और अन्य वित्तीय नियमों का पालन करना होगा, जैसा कि संस्थान के नियमों में निर्धारित है।
AIIMS से भी करवाई गई थी मेडिकल जांच
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को छात्र का मेडिकल असेसमेंट करने का निर्देश दिया था। मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अदालत ने छात्र के स्वास्थ्य और उपचार की जरूरतों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ा ध्यान
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है। हाल के वर्षों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और मनोवैज्ञानिक सहायता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा बढ़ी है। ऐसे मामलों में अदालतों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की मांग भी लगातार उठती रही है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस बात का संकेत माना जा रहा है कि छात्रों की शैक्षणिक जरूरतों के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
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