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Priyanka Gandhi’s Comment on Exam Reform Panel Triggers Row; Over 215 Academics Back Prof. V. Kamakoti 

प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर विवाद: कौन हैं IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि, क्यों लिखना पड़ा 215 शिक्षाविदों को खुला पत्र? 

Priyanka Gandhi’s Comment on Exam Reform Panel Triggers Row; Over 215 Academics Back Prof. V. Kamakoti 

लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। परीक्षा एजेंसियों में सुधार के लिए गठित हाई-पावर टास्क फोर्स पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि “एक पूर्व आईबी प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गोमूत्र एक्सपर्ट शिक्षा व्यवस्था को कैसे समझेंगे?”।

हालांकि प्रियंका गांधी ने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन इस टिप्पणी को व्यापक रूप से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि की ओर इशारा माना गया। इसके बाद देशभर के 215 से अधिक कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने खुला पत्र जारी कर इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। यह मामला अब शिक्षा, राजनीति और वैज्ञानिक विमर्श से जुड़ी बहस का विषय बन गया है।

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटि?

प्रो. वी. कामकोटि देश के प्रमुख कंप्यूटर वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा (Information Security) और वीएलएसआई डिजाइन (VLSI Design) जैसे क्षेत्रों में है।

उन्होंने वर्ष 2001 में IIT मद्रास में फैकल्टी सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं और जनवरी 2022 में संस्थान के निदेशक बने। IIT मद्रास में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय समर्थित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया है, जिनमें माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम और सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं।

प्रो. कामकोटि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। IIT मद्रास में उन्होंने JEE चेयरमैन और एसोसिएट डीन (इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है।

भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें DRDO Academic Excellence Award, Techno Visionary Award, Abdul Kalam Technology Innovation National Fellowship, IBM Faculty Award और कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है।

प्रियंका गांधी की टिप्पणी से क्यों जुड़ा उनका नाम?

इस विवाद की जड़ जनवरी 2025 में दिया गया प्रो. कामकोटि का एक बयान माना जा रहा है। चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों का उल्लेख किया था। उन्होंने एक उदाहरण साझा करते हुए कहा था कि गोमूत्र के सेवन के बाद एक व्यक्ति का बुखार कम हो गया। साथ ही उन्होंने इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों पर भी टिप्पणी की थी।

उस समय उनके बयान की विपक्षी दलों और कुछ वैज्ञानिक समूहों ने आलोचना की थी। इसी वजह से लोकसभा में प्रियंका गांधी की हालिया टिप्पणी को प्रो. कामकोटि से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि उन्होंने उनका नाम नहीं लिया था।

परीक्षा सुधार समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए छह सदस्यीय हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया था।

समिति में देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना से जुड़े नंदन नीलेकणि, इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी प्रमुख तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

सरकार का उद्देश्य तकनीक, प्रशासन, सुरक्षा और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों की मदद से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

कुलपतियों और शिक्षाविदों ने क्यों जताई आपत्ति?

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद देशभर के 215 से अधिक कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने संयुक्त रूप से एक खुला पत्र जारी किया। पत्र में कहा गया कि किसी विद्वान या वैज्ञानिक के विचारों पर बहस की जा सकती है, लेकिन उसे किसी विशेष उपनाम या व्यंग्यात्मक पहचान से संबोधित करना स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद के अनुरूप नहीं है।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि संसद ऐसा मंच है जहां तर्क, तथ्य और विचारों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि किसी शिक्षाविद के शैक्षणिक योगदान को नजरअंदाज कर उसे किसी विवादित बयान तक सीमित करना पूरे शैक्षणिक समुदाय के लिए चिंताजनक संदेश देता है।

पत्र में क्या कहा गया?

खुले पत्र में प्रो. कामकोटि की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उनके 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वे 50 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि भारत के पहले इंडस्ट्री-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

शिक्षाविदों ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक सोच का अर्थ केवल किसी विचार का विरोध करना नहीं, बल्कि हर दावे की निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित जांच करना है। यदि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति हो तो उसके तथ्यों और तर्कों को चुनौती दी जानी चाहिए, न कि उसके शैक्षणिक योगदान को कमतर आंका जाना चाहिए।

शिक्षा और राजनीति के बीच बढ़ी बहस

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब परीक्षा सुधार, शिक्षा नीति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जैसे विषय राष्ट्रीय बहस के केंद्र में हैं। एक ओर विपक्ष परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षाविदों का एक वर्ग मानता है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्तियों का मूल्यांकन उनके शैक्षणिक और पेशेवर योगदान के आधार पर होना चाहिए।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और सार्वजनिक विमर्श की मर्यादा पर व्यापक चर्चा का कारण बन गया है।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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