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Four IIT Bombay Scientists Recommended for Prestigious J.C. Bose Grant for Excellence in Research

IIT Bombay के 4 वैज्ञानिकों को मिलेगा J.C. Bose Grant, भूकंप सुरक्षा और नई दवाओं पर शोध को मिली पहचान

Four IIT Bombay Scientists Recommended for Prestigious J.C. Bose Grant for Excellence in Research

देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों में शामिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के चार वरिष्ठ वैज्ञानिकों को इस वर्ष प्रतिष्ठित J.C. Bose Grant के लिए चुने जाने की सिफारिश की गई है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान की बढ़ती वैश्विक पहचान को भी दर्शाती है।

इस सम्मान के लिए जिन वैज्ञानिकों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं, उनमें प्रो. एम. रविकांत, प्रो. दीपांकर चौधरी, प्रो. रुचि आनंद और प्रो. देबब्रत मैती शामिल हैं। चारों शोधकर्ता विज्ञान और इंजीनियरिंग के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे महत्वपूर्ण शोध कर रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव समाज, स्वास्थ्य, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ता है।

विज्ञान और समाज को जोड़ने वाले शोधों को मिली मान्यता

IIT बॉम्बे के इन वैज्ञानिकों का शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान से भी जुड़ा हुआ है। इनके कार्यों में भूकंपरोधी निर्माण तकनीक, एंटीबायोटिक प्रतिरोध, नई दवाओं का विकास और उन्नत रसायन विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे शोध भविष्य की तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

प्रो. एम. रविकांत के शोध को अंतरराष्ट्रीय पहचान

रसायन विज्ञान विभाग से जुड़े प्रो. एम. रविकांत का शोध पोर्फिरिन और मैक्रोसाइक्लिक अणुओं पर केंद्रित है। उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

उनका काम केमिकल सेंसिंग, फोटोकेमिस्ट्री और उन्नत सामग्री (Advanced Materials) के विकास में उपयोगी माना जाता है। यह शोध भविष्य में नई तकनीकों और वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में योगदान दे सकता है।

सुरक्षित भवन निर्माण पर काम कर रहे हैं प्रो. दीपांकर चौधरी

सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. दीपांकर चौधरी भूकंप इंजीनियरिंग और भू-तकनीकी अनुसंधान के विशेषज्ञ हैं। उनका शोध भूकंप के दौरान मिट्टी के व्यवहार, मजबूत नींव निर्माण और सुरक्षित भवन डिजाइन पर केंद्रित है।

उन्होंने भारत के इंजीनियरिंग मानक IS: 19117 के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध से देश में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा मिला है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर शोध कर रही हैं प्रो. रुचि आनंद

IIT बॉम्बे के रसायन विज्ञान विभाग की प्रमुख प्रो. रुचि आनंद एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, स्ट्रक्चरल बायोकेमिस्ट्री और बायोसेंसर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

उनका शोध यह समझने में मदद करता है कि बैक्टीरिया समय के साथ दवाओं के प्रति प्रतिरोध कैसे विकसित करते हैं। यह अध्ययन भविष्य में अधिक प्रभावी एंटीबायोटिक और उपचार पद्धतियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

नई दवाओं के विकास को गति दे रहा है प्रो. देबब्रत मैती का शोध

प्रो. देबब्रत मैती सिंथेटिक ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के क्षेत्र के प्रमुख वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। उनका शोध C-H Bond Activation तकनीक पर आधारित है, जिसे आधुनिक औषधि विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक नई दवाओं के निर्माण को अधिक तेज, प्रभावी और किफायती बनाने में मदद कर सकती है। उनके शोध कार्यों ने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में भी खास पहचान बनाई है।

क्या है J.C. Bose Grant?

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) द्वारा प्रदान किया जाने वाला J.C. Bose Grant देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक माना जाता है। यह अनुदान उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में लंबे समय तक उत्कृष्ट शोध किया हो और जो वर्तमान में भी नवाचार एवं उच्च स्तरीय अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे हों।

यह सम्मान आमतौर पर 45 से 65 वर्ष आयु वर्ग के उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिनका योगदान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली माना जाता है।

भारतीय अनुसंधान को मिली नई मजबूती

IIT बॉम्बे के चार वैज्ञानिकों का एक साथ इस सम्मान के लिए चयनित होना भारतीय विज्ञान और अनुसंधान क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि देश के शोध संस्थान वैश्विक चुनौतियों से जुड़े विषयों पर प्रभावी और उपयोगी शोध कर रहे हैं।

स्वास्थ्य, रसायन विज्ञान, दवा निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में इन वैज्ञानिकों का योगदान आने वाले वर्षों में नई तकनीकों और समाधानों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

 

 

Asmita Sarkar

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