
देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच संसद ने लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार एक भरोसेमंद, पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेपर माफिया, प्रश्नपत्र लीक कराने वाले गिरोह और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से देश के लगभग सभी राज्यों और केंद्र सरकार को पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा है। इसी वजह से एक ऐसे सख्त कानून की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत कर सके। उन्होंने बताया कि विधेयक तैयार करते समय राज्यों के सुझावों को भी शामिल किया गया, ताकि कानून अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बन सके।
संसद में दो दिनों तक हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि पिछले दो दिनों में संसद के दोनों सदनों में इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा हुई। बड़ी संख्या में सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया और अपने सुझाव रखे। चर्चा के बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों ने विधेयक को पारित कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह कदम देश में एक मजबूत और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की जिम्मेदारी केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए आगे भी सुधार जारी रहेंगे।
पेपर लीक और संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लाखों छात्र वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि युवाओं के सपनों और उनके भविष्य को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी छात्र की मेहनत पर कोई माफिया या संगठित गिरोह पानी न फेर सके। नए कानून के माध्यम से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा।
देशवासियों से की सहयोग की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के अंत में कहा कि देश अब ऐसी परिस्थितियों को लंबे समय तक स्वीकार नहीं करेगा, जिनसे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो। उन्होंने नागरिकों से विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि सभी को मिलकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देना चाहिए।
उनका कहना था कि जब परीक्षा प्रणाली निष्पक्ष और भरोसेमंद होगी, तभी युवाओं को अपनी प्रतिभा के आधार पर आगे बढ़ने का समान अवसर मिलेगा।
अमित शाह ने बताया छात्रों के भविष्य की सुरक्षा का बड़ा कदम
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 के संसद से पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर करने वाले अपराधों के खिलाफ सबसे मजबूत निवारक साबित होगा।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने इस विधेयक को पारित कर छात्रों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उनके अनुसार, नया कानून उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा जो परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से समझौता करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि मेरिट आधारित व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि देश के युवा अपनी मेहनत, योग्यता और ईमानदार प्रतिस्पर्धा के आधार पर अपने सपनों को पूरा कर सकें।
परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ाई थीं। ऐसे में सरकार का यह कदम परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास बहाल करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का कहना है कि नए कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ तकनीकी निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।




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