
वॉशिंगटन: अमेरिका की प्रतिष्ठित विज्ञान प्रतियोगिता 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज 2026 में भारतीय मूल के छात्रों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। इस वर्ष प्रतियोगिता के टॉप 10 फाइनलिस्ट में पांच भारतीय-अमेरिकी मिडिल स्कूल छात्रों ने जगह बनाई है। इन छात्रों ने ऐसे नवाचार आधारित वैज्ञानिक प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए हैं, जो सड़क सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, समुद्री विज्ञान, स्वास्थ्य और जल संरक्षण जैसी वास्तविक चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित हैं।
3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज अमेरिका की सबसे प्रमुख छात्र विज्ञान प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। इसमें कक्षा 5 से 8 तक के छात्र भाग लेते हैं और अपने वैज्ञानिक विचारों को व्यावहारिक समाधान के रूप में प्रस्तुत करते हैं। प्रतियोगिता के विजेता को 25,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 21 लाख रुपये) की पुरस्कार राशि के साथ “अमेरिका का टॉप यंग साइंटिस्ट” का सम्मान दिया जाता है।
टॉप 10 में शामिल हुए पांच भारतीय-अमेरिकी छात्र
इस वर्ष फाइनलिस्ट सूची में जगह बनाने वाले भारतीय-अमेरिकी छात्रों में शार्वी महाजन (कैलिफोर्निया), राजी दोशी (कनेक्टिकट), आरिका कुंडू (मिनेसोटा), आयशा आसिफ (फ्लोरिडा) और नबोश्री सन्ट्रा (फ्लोरिडा) शामिल हैं। इन छात्रों के प्रोजेक्ट्स को उनकी वैज्ञानिक सोच, सामाजिक उपयोगिता और नवाचार क्षमता के आधार पर चुना गया है।
सड़क सुरक्षा के लिए AI आधारित समाधान
कैलिफोर्निया की छात्रा शार्वी महाजन ने ‘न्यूरो ड्राइव अलर्ट’ नामक एक एआई और ईईजी आधारित प्रणाली विकसित की है। यह तकनीक वाहन चालक की थकान और माइक्रो-स्लीप के शुरुआती संकेतों का पता लगाने में मदद कर सकती है। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को कम करना और ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित बनाना है।
समुद्री पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित प्रोजेक्ट
कनेक्टिकट के छात्र राजी दोशी ने शैवाल और कैल्शियम आधारित सामग्री का उपयोग करते हुए एक ऐसा समाधान तैयार किया है, जो समुद्रों में बढ़ती अम्लीयता (Ocean Acidification) को कम करने में सहायक हो सकता है। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
फलों और सब्जियों से कीटनाशक अवशेष हटाने की तकनीक
मिनेसोटा की आरिका कुंडू ने LIGNEX नामक तकनीक विकसित की है। इसमें मूंगफली के छिलकों से तैयार जैविक सामग्री का उपयोग कर फलों और सब्जियों पर मौजूद कीटनाशकों के अवशेषों को हटाने का तरीका प्रस्तावित किया गया है। यह तकनीक खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है।
समुद्री विज्ञान के लिए पर्यावरण-अनुकूल चिपकने वाला पदार्थ
फ्लोरिडा की आयशा आसिफ ने मसल (Mussel) से प्रेरित एक पर्यावरण-अनुकूल चिपकने वाला पदार्थ तैयार किया है। इस नवाचार का उपयोग समुद्री अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी विकल्प भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जल संरक्षण में मदद कर सकता है नया नवाचार
फ्लोरिडा की ही नबोश्री सन्ट्रा ने बायोडिग्रेडेबल सॉइल शेड बॉल्स विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य मिट्टी में नमी बनाए रखना और सूखे की स्थिति में पानी की कमी के प्रभाव को कम करना है। जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फाइनल से पहले मिलेगा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन
प्रतियोगिता के अगले चरण में सभी फाइनलिस्ट 3M के वैज्ञानिकों के साथ विशेष मेंटरशिप कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान उन्हें अपने प्रोजेक्ट्स को और बेहतर बनाने, वैज्ञानिक परीक्षणों को मजबूत करने और प्रस्तुति कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
इसके बाद सभी फाइनलिस्ट 12 और 13 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के मिनेसोटा राज्य के सेंट पॉल स्थित 3M इनोवेशन सेंटर में आयोजित अंतिम चरण की प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। यहां छात्रों को लाइव साइंस चैलेंज पूरे करने होंगे और अपने प्रोजेक्ट विशेषज्ञों की जूरी के सामने प्रस्तुत करने होंगे।
रोजमर्रा की समस्याओं पर केंद्रित हैं इस साल के प्रोजेक्ट
इस वर्ष के फाइनलिस्ट प्रोजेक्ट्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल वैज्ञानिक अवधारणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करते हैं जिनका सामना लोग रोजमर्रा के जीवन में करते हैं। सड़क दुर्घटनाओं से लेकर जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जल संरक्षण तक, इन नवाचारों का लक्ष्य समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में वैज्ञानिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने वाले ऐसे छात्र भविष्य में विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। भारतीय मूल के छात्रों की मजबूत उपस्थिति यह भी दर्शाती है कि वैश्विक विज्ञान मंच पर भारतीय समुदाय की नई पीढ़ी लगातार अपनी पहचान बना रही है।




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