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From Macaulay’s Education System to NEP 2020: How India’s Education System is Evolving and the Direction for the Future

मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से NEP 2020 तक: कैसे बदल रही है भारत की शिक्षा प्रणाली और भविष्य की दिशा

From Macaulay’s Education System to NEP 2020: How India’s Education System is Evolving and the Direction for the Future

भारत की शिक्षा व्यवस्था ने पिछले दो सौ वर्षों में लंबा सफर तय किया है। 19वीं सदी में ब्रिटिश प्रशासक थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने जिस शिक्षा मॉडल की नींव रखी थी, उसका उद्देश्य औपनिवेशिक शासन की जरूरतों को पूरा करना था। उस समय शिक्षा का मुख्य लक्ष्य ऐसे अंग्रेजी शिक्षित भारतीय तैयार करना था जो ब्रिटिश प्रशासन को चलाने में सहायता कर सकें। इस व्यवस्था में मानकीकरण, परीक्षाओं और रटकर सीखने पर विशेष जोर दिया गया, जिससे बड़ी संख्या में क्लर्क और प्रशासनिक कर्मचारी तैयार हुए।

वहीं, वर्ष 2020 में लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य पूरी तरह अलग है। यह नीति भारत को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को समर्थन देने के लिए बनाई गई है। यदि मैकाले की शिक्षा व्यवस्था एक साम्राज्य की प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए थी, तो NEP का लक्ष्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो भविष्य के भारत का नेतृत्व कर सकें।

रटने वाली शिक्षा से नवाचार और कौशल आधारित शिक्षा की ओर

मैकाले की शिक्षा प्रणाली एक समान पाठ्यक्रम और याद करके परीक्षा पास करने पर आधारित थी। इसके विपरीत, NEP 2020 आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, नवाचार, लचीलापन और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देती है। यह पिछले 34 वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है और स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वाकांक्षी शिक्षा सुधारों में शामिल है।

नई नीति के तहत छात्रों को केवल एक विषय या स्ट्रीम तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है। अब विज्ञान, वाणिज्य और कला के बीच की पारंपरिक सीमाएं धीरे-धीरे समाप्त की जा रही हैं, ताकि विद्यार्थी अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुसार विषयों का चयन कर सकें।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ा विस्तार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने के बाद भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है। वर्ष 2014 में देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 723 थी, जो 2024 तक बढ़कर 1,213 हो गई। इसी अवधि में उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की संख्या लगभग 51,500 से बढ़कर करीब 59,000 तक पहुंच गई।

इस वृद्धि के पीछे NEP 2020 के साथ-साथ नए केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) जैसी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

आज भारत में 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), 21 भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) और 20 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) कार्यरत हैं। इसके अलावा अबू धाबी और जंजीबार में IIT परिसरों की स्थापना भारत की वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति को भी मजबूत कर रही है।

छात्रों को मिल रही है अधिक लचीलापन

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक प्रमुख उद्देश्य छात्रों को अधिक स्वतंत्रता और लचीलापन देना है। इसके तहत मल्टीपल एंट्री और एग्जिट विकल्प, बहुविषयक पाठ्यक्रम और क्रेडिट ट्रांसफर जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं।

इसी दिशा में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र विभिन्न संस्थानों से अर्जित किए गए अकादमिक क्रेडिट्स को जमा, सुरक्षित और ट्रांसफर कर सकते हैं। वर्तमान में 2,600 से अधिक संस्थान इससे जुड़े हुए हैं और 4.6 करोड़ से अधिक छात्र आईडी जारी की जा चुकी हैं।

150 से अधिक विश्वविद्यालय पहले ही NEP के अनुरूप लचीली प्रवेश और निकास व्यवस्था को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने पर जोर

NEP 2020 का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio-GER) को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस दिशा में प्रगति हो रही है। वर्ष 2021-22 में उच्च शिक्षा में नामांकित छात्रों की संख्या 4.33 करोड़ थी, जो 2022-23 में बढ़कर 4.46 करोड़ हो गई। इससे यह संकेत मिलता है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ रही है।

शोध और नवाचार को मिल रहा बढ़ावा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शोध और नवाचार को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसी उद्देश्य से अनुसंधान राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना की गई है। इसका लक्ष्य भारत के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।

इसके अलावा MERITE जैसे कार्यक्रम तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।

वैश्विक शिक्षा केंद्र बनने की दिशा में भारत

NEP 2020 का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है। नई नीतियों के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ ट्विनिंग, संयुक्त और ड्यूल डिग्री कार्यक्रमों की अनुमति दी गई है।

कई अंतरराष्ट्रीय संस्थान भारत में अपने परिसर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या को कम करना है।

शिक्षा और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और रोजगार क्षमता अब आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं। इसी सोच के तहत व्यावसायिक शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग, स्टार्टअप्स और उद्योग-शिक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नीति निर्माताओं का मानना है कि केवल युवा आबादी होना पर्याप्त नहीं है। भारत को वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, नवाचार और सेवा क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए अपने युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल और शोध क्षमता से लैस करना होगा।

आगे की राह

राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक व्यापक योजना के रूप में देखी जा रही है। इसका उद्देश्य शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना, शोध को मजबूत करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और आजीवन सीखने की संस्कृति विकसित करना है।

हालांकि चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। सभी राज्यों में समान रूप से नीति को लागू करना, शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, शोध के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण मुद्दे बने रहेंगे।

फिर भी यह स्पष्ट है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। यदि मैकाले की शिक्षा प्रणाली प्रशासनिक कर्मचारियों को तैयार करने के लिए बनाई गई थी, तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का लक्ष्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो वैज्ञानिक, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, उद्यमी और भविष्य के नेतृत्वकर्ता बन सकें। यही बदलाव भारत को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ाने की क्षमता रखता है।

 

 

Asmita Sarkar

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