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JPSC Controversy: Why did the student protest erupt in Jharkhand?

JPSC विवाद: झारखंड में क्यों भड़का छात्रों का आंदोलन,  क्या हैं आरोप, जांच और कोर्ट की स्थिति?

JPSC Controversy: Why did the student protest erupt in Jharkhand?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं का आक्रोश इन दिनों राज्यव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। राजधानी रांची में लगातार धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। आंदोलन की शुरुआत 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के प्रारंभिक परिणामों को लेकर उठे सवालों से हुई, लेकिन अब यह मामला राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तक पहुंच गया है।

छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई, हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई और राजनीतिक बयानबाजी ने इस मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

क्या है JPSC और इसकी भूमिका?

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) राज्य का संवैधानिक भर्ती आयोग है, जिसकी स्थापना 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के बाद संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत की गई थी। आयोग राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी पदों पर भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करता है और चयन प्रक्रिया को संचालित करता है।

हाल ही में आयोग को बड़ा झटका तब लगा जब 22 जुलाई 2026 को तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ऐसे समय आया जब 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर विवाद और जांच दोनों तेज हो चुके थे।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद की शुरुआत 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के प्रारंभिक परिणाम घोषित होने के बाद हुई। आयोग ने 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया। परिणाम जारी होने के तुरंत बाद अभ्यर्थियों ने श्रेणीवार कट-ऑफ सार्वजनिक न किए जाने पर सवाल उठाए।

इसके बाद मेरिट सूची को लेकर भी विवाद सामने आया। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि प्रकाशित सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ कथित ओएमआर शीट वायरल हुईं, जिनके आधार पर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। हालांकि इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन्हीं आरोपों ने छात्रों के असंतोष को बड़े आंदोलन में बदल दिया।

आंदोलन ने कैसे लिया राज्यव्यापी रूप?

शुरुआत में कुछ छात्र JPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन देखते ही देखते यह आंदोलन रांची के प्रमुख स्थलों तक पहुंच गया। मोराबादी स्थित बापू वाटिका, अल्बर्ट चौक और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम जैसे स्थान आंदोलन के केंद्र बन गए।

छात्र नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है बल्कि वर्षों से भर्ती प्रक्रियाओं में उठते सवालों के खिलाफ युवाओं का सामूहिक विरोध है। आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की और मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा कराने की है। इसके साथ ही वे JPSC और JSSC की भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार, परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि केवल जांच शुरू कर देने से विश्वास बहाल नहीं होगा, बल्कि भर्ती प्रणाली में स्थायी सुधार भी जरूरी हैं।

सरकार और CID ने अब तक क्या कार्रवाई की?

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सरकार ने जांच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी। CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और जांच शुरू कर दी।

जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां भी हुईं। पूर्व JPSC उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत परीक्षा संचालन से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बाद में परीक्षा आयोजन से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई।

हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उन्हें राज्य एजेंसियों की जांच पर पूरा भरोसा नहीं है और वे मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग पर कायम हैं।

CID ने अभ्यर्थियों से मांगी OMR शीट

29 जुलाई 2026 को CID ने सार्वजनिक सूचना जारी कर 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों से जांच में सहयोग करने की अपील की।

जांच एजेंसी ने अभ्यर्थियों से पेपर-1 और पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा। इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच करना बताया गया। यह कदम जांच को तकनीकी और दस्तावेजी आधार पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

JPSC ने नौ परीक्षाएं स्थगित कीं

विवाद बढ़ने के बीच 22 जुलाई 2026 को JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 सहित कुल नौ भर्ती परीक्षाओं को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया। आयोग ने कहा कि सरकार से प्राप्त निर्देशों और परीक्षा संचालन से जुड़े मुद्दों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

नई परीक्षा तिथियों की घोषणा जांच और स्थिति स्पष्ट होने के बाद की जाएगी।

हाईकोर्ट में क्या चल रहा है?

14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने मॉडल उत्तर कुंजी में त्रुटियों, कट-ऑफ सार्वजनिक न करने और कथित चयन अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

सुनवाई के दौरान JPSC ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और मुख्य परीक्षा पहले ही स्थगित की जा चुकी है। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी है, लेकिन आयोग को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

क्या JPSC पहले भी विवादों में रहा है?

झारखंड में यह पहला मौका नहीं है जब JPSC की भर्ती प्रक्रिया विवादों में आई हो। राज्य गठन के बाद कई सिविल सेवा परीक्षाओं में परिणाम, इंटरव्यू अंक, आरक्षण नीति, उत्तर कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कुछ पुराने मामलों में जांच एजेंसियां अब भी जांच कर रही हैं।

इसी कारण वर्तमान विवाद को छात्र केवल एक परीक्षा की समस्या नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही कमियों का हिस्सा बता रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा ने JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग उठाई है। पार्टी नेताओं ने राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने आंदोलनरत छात्रों के प्रति समर्थन जताया है। इससे यह मुद्दा अब केवल भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि झारखंड की प्रशासनिक पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार के सवाल से भी जुड़ गया है।

युवाओं के भरोसे की परीक्षा

झारखंड में जारी यह आंदोलन केवल एक परीक्षा के परिणाम का विरोध नहीं है। यह उन युवाओं की आवाज है जो वर्षों की तैयारी के बाद भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं। अब जांच एजेंसियों, अदालत और सरकार के अगले कदम पर हजारों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि यह विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित रहता है या भर्ती सुधारों की दिशा में बड़ा बदलाव लेकर आता है।

 

 

Asmita Sarkar

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