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Journalism is Not Dying, Bad Journalism is

क्या पत्रकारिता खत्म हो रही है? जानिए क्यों खराब पत्रकारिता संकट में है, पत्रकारिता नहीं

Journalism is Not Dying, Bad Journalism is

हर कुछ महीनों में यह चर्चा फिर शुरू हो जाती है कि पत्रकारिता मर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूब आधारित कंटेंट क्रिएशन के बढ़ते प्रभाव को देखकर कई लोगों को लगता है कि पत्रकारिता अब अपनी प्रासंगिकता खो रही है। लेकिन जब लोग पहले से कहीं अधिक जानकारी और समाचारों का उपभोग कर रहे हैं, तो सवाल यह है कि क्या वास्तव में पत्रकारिता खत्म हो रही है, या लोग केवल उस पत्रकारिता से दूरी बना रहे हैं जिस पर उन्हें भरोसा नहीं है? शायद पत्रकारिता नहीं, बल्कि खराब पत्रकारिता खत्म हो रही है।

भरोसा बन चुका है नई सबसे बड़ी ताकत

लोग समाचार पढ़ना इसलिए बंद नहीं कर रहे क्योंकि उन्हें पत्रकारिता पसंद नहीं है। वे तब दूर होते हैं जब सुर्खियां (हेडलाइंस) कहानी से ज्यादा वादे करती हैं, जब तथ्यों की जगह राय परोसी जाती है और जब सटीकता से ज्यादा महत्व तेजी को दिया जाता है।

डिजिटल युग में कोई भी व्यक्ति कंटेंट प्रकाशित कर सकता है। लेकिन पत्रकारिता और सामान्य कंटेंट क्रिएशन के बीच सबसे बड़ा अंतर है विश्वसनीयता, सत्यापन और जवाबदेही। यही वजह है कि चुनावों, प्राकृतिक आपदाओं, नीतिगत बदलावों और बड़े वैश्विक घटनाक्रमों के दौरान लोग अब भी भरोसेमंद समाचार स्रोतों की ओर रुख करते हैं। गलत सूचनाओं के इस दौर में विश्वसनीय पत्रकारिता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

पाठकों को शोर नहीं, उपयोगी जानकारी चाहिए

एक समय था जब क्लिकबेट हेडलाइंस आसानी से लोगों का ध्यान खींच लेती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। पाठक केवल यह नहीं जानना चाहते कि क्या हुआ, बल्कि यह भी समझना चाहते हैं कि ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या असर पड़ेगा।

शिक्षा, बिजनेस, टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में लोग ऐसी पत्रकारिता को महत्व दे रहे हैं जो उनके सवालों के जवाब दे, विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग करे और विषय को सही संदर्भ में समझाए। समाचारों का भविष्य केवल अधिक कंटेंट खपत में नहीं, बल्कि बेहतर और सूचित निर्णय लेने में छिपा है।

AI पत्रकारिता का अंत नहीं, उसका नया भविष्य है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिपोर्टों का सारांश तैयार कर सकता है, डेटा का विश्लेषण कर सकता है और लेख भी लिख सकता है। लेकिन यह संपादकीय निर्णय, नैतिक सोच और जमीनी रिपोर्टिंग की जगह नहीं ले सकता।

एक पत्रकार ही तय करता है कि कौन-सी जानकारी जनता तक पहुंचनी चाहिए, कौन-सा स्रोत विश्वसनीय है और कोई खबर निष्पक्ष, संतुलित तथा जनहित में है या नहीं। इसलिए तकनीक पत्रकारों के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बन सकती है, लेकिन पत्रकारिता का विकल्प नहीं।

पत्रकारिता के छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है?

पत्रकारिता में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए यह किसी अंत की नहीं, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत है। आज के न्यूज़रूम ऐसे पेशेवरों की तलाश कर रहे हैं जो तथ्यों की पुष्टि कर सकें, सूचनाओं का विश्लेषण कर सकें, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की समझ रखते हों, डेटा का जिम्मेदारी से उपयोग कर सकें और दर्शकों के साथ भरोसेमंद संबंध बना सकें।

आज केवल अच्छी लेखन क्षमता पर्याप्त नहीं है। मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग, डेटा जर्नलिज्म, फैक्ट-चेकिंग और खोजी पत्रकारिता जैसी स्किल्स भी उतनी ही महत्वपूर्ण बन चुकी हैं।

असली सवाल क्या है?

अब सवाल यह नहीं रह गया कि पत्रकारिता बचेगी या नहीं। असली सवाल यह है कि भविष्य में किस तरह की पत्रकारिता प्रासंगिक रहेगी।

इसका जवाब धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। वह पत्रकारिता जो जल्दबाजी से नहीं बल्कि सटीकता से काम करती है, जो अनुमानों के बजाय साक्ष्यों पर आधारित होती है और जो वायरल होने के बजाय जनहित को प्राथमिकता देती है, वही आने वाले दशकों तक अपनी प्रासंगिकता बनाए रखेगी।

छात्रों को क्या समझना चाहिए?

पत्रकारिता खत्म नहीं हो रही है, बल्कि बदल रही है। जैसे-जैसे गलत सूचनाएं बढ़ रही हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स समाचार उपभोग के तरीकों को बदल रहे हैं, वैसे-वैसे भरोसेमंद, नैतिक और साक्ष्य-आधारित पत्रकारिता की जरूरत भी बढ़ रही है।

भविष्य की पत्रकारिता सबसे तेज़ होने वालों की नहीं, बल्कि सबसे विश्वसनीय होने वालों की होगी।

 

 

Asmita Sarkar

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