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33 out of 125 questions in the UPESSC recruitment exam found incorrect; High Court summons Commission Secretary and Controller of Examinations

UPESSC भर्ती परीक्षा में 125 में से 33 प्रश्न गलत, हाईकोर्ट ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को किया तलब

33 out of 125 questions in the UPESSC recruitment exam found incorrect; High Court summons Commission Secretary and Controller of Examinations

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आयोग की परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने कहा कि यदि किसी परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों का एक बड़ा हिस्सा गलत पाया जाता है, तो केवल उन प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में बांट देना समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता। अदालत ने आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों में त्रुटियां कैसे रह गईं।

125 में से 33 प्रश्नों पर उठे सवाल

यह मामला रिट-ए संख्या 9799/2026, आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि पहले 29 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पाए गए थे। इसके बाद विशेषज्ञों की समीक्षा में चार और प्रश्नों को भी गलत माना गया। इस तरह कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न त्रुटिपूर्ण पाए गए।

आयोग ने इन गलत प्रश्नों के अंक शेष सही प्रश्नों में वितरित करते हुए संशोधित चयन सूची जारी की है। नई सूची में 42 नए अभ्यर्थियों को चयन के लिए शामिल किया गया है। हालांकि, अदालत आयोग की इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं दिखी।

परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे गंभीर प्रश्न

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जब किसी परीक्षा में लगभग 25 प्रतिशत प्रश्न गलत पाए जा रहे हों, तो यह केवल परिणाम सुधारने का मामला नहीं रह जाता। इससे पूरी परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया और विशेषज्ञों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अदालत ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है। यदि बड़ी संख्या में प्रश्न गलत पाए जाते हैं, तो इसका सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। ऐसे मामलों में केवल अंक पुनर्वितरित कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

सचिव और परीक्षा नियंत्रक को कोर्ट में होना होगा उपस्थित

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह बताना होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कैसे संचालित होती है, विषय विशेषज्ञों का चयन किस आधार पर किया जाता है और भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए आयोग कौन-कौन से कदम उठाने जा रहा है।

अगली सुनवाई 5 अगस्त को

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आयोग को अपना पूरा पक्ष शपथपत्र के माध्यम से रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ की जाएगी।

यह मामला उत्तर प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस बनता जा रहा है। अदालत के ताजा निर्देशों के बाद अब नजर आयोग के जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर न केवल इस भर्ती प्रक्रिया बल्कि भविष्य की परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।

 

 

 

Asmita Sarkar

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